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पहल : अनलॉक के दौर में जनवरी से पुन: सक्रिय होगा जैविक बाजार (Organic Market)

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कोरोना संक्रमण काल में बढ़ी जैविक की महत्ता

इटारसी। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण ने दुनिया को नये सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। इस महामारी ने जहां लोगों के रहन-सहन के तौर तरीके बदले हैं, खानपान में भी आमूल-चूल परिवर्तन किया है। कोरोना संक्रमण के दौरान जहां हमें नये शब्द मिले, वहीं एक पुराना शब्द ताकतवर बनकर उभरा। वह शब्द है, रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी। अब तक जिस खानपान के हम गुलाम थे, उससे मुक्त होकर पुरखों के खानपान की तरफ वापसी की। ऐसे में जैविक और प्राकृतिक खेती से उत्पन्न अनाज की ओर रुझान बढ़ चला है। अब जैविक खेती (Organic farming) करने वाले किसानों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ायी है और नित नये तरीके से अपनी आमदनी बढ़ाने की ओर चल पड़े हैं।
नर्मदांचल के होशंगाबाद और हरदा जिले जैविक खेती (Organic farming) के मामले में नेतृत्व करने की राह पर हैं। यहां लगभग आधा सैंकड़ा किसान ऐसे हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थिति के बावजूद जैविक खेती की राह पकड़ी और उसमें सफल भी हो रहे हैं। जैविक में संभावना नहीं होने की पुरानी सोच को भी बदलने का उनमें माद्दा है। जैविक से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखने की चाह में अब बड़ी संख्या में लोग इसे अपनाने लगे हैं। इसी परिस्थिति ने इटारसी में जन्म दिया था, जैविक बाजार को। कोरोनाकाल में जब लॉकडाउन था, तब यह बाजार भी बंद कर दिया था। अब जनवरी से इसे पुन: प्रारंभ करने के लिए ग्राम सेवा समिति रोहना-निटाया () की तैयारी प्रारंभ हो गयी है। मिलते हैं, कुछ ऐसे किसान और विशेषज्ञों से जो, जैविक की खासियत बताते हैं और इसे उन्नत बनाने की दिशा में वर्षों से प्रयास कर रहे हैं।

पुरस्कार भी पा चुके हैं रूपसिंह
जमीन को रसायन के प्रभाव से बचाकर जैविक खेती की शुरुआत करने वाले रोहना के किसान रूपसिंह राजपूत (Roop Singh Rajput) ने अपनी महज पांच एकड़ जमीन में करीब दस साल पहले जैविक खेती करने का फैसला किया था। लगन और मेहनत से कार्य करते हुए आज वे अग्रणी किसान बन चुके हैं। वर्ष 2012 में प्रदेश सरकार उन्हें सर्वोत्तम कृषक के रूप में पुरस्कृत कर चुकी है। वर्ष 2013 में अहमदाबाद में हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेस्ट किसान का अवार्ड (Best Farmer Award) दिया। अहमदाबाद में ही हुए मई 2016 के दो दिवसीय कार्यक्रम में उनके टॉनिक जीमावत को सराहा गया। रूपसिंह बताते हैं कि लगातार रसायनिक खादों व दवाइयों से मिट्टी के साथ मानव शरीर पर भी दुष्प्रभाव हो रहे हैं। आने वाली पीढिय़ों को इनसे बचाने के लिए जैविक खेती की ओर मुडऩा होगा। यह खेती थोड़ी महंगी पड़ती है। लेकिन बाजार में दाम भी सामान्य फसलों से ज्यादा मिलते हैं। वे बताते हैं कि हमारे खेतों की जमीन में से छोटे छोटे जीव जन्तु नष्ट हो गए हैं यदि जीव जन्तुओं की मात्रा जमीन में बढ़ जाए तो जमीन की उर्वरकता एवं उत्पादन दोनों ही बढ़ जाएंगे।

prateek Sharma
अच्छी पगार वाली नौकरी छोड़ दी
ग्राम ढाबाखुर्द (Village Dhabakhurd) में जैविक खेती (Organic farming) करने वाले किसान प्रतीक शर्मा (Prateek Sharma) कहते हैं कि कोरोना काल में जैविक उत्पादों का महत्व बढ़ा है, क्योंकि विशेषज्ञों ने माना कि यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है, जबकि रासायनिक खेती से उत्पन्न खाद्य पदार्थों में यह क्षमता नहीं होती है। प्रतीक शर्मा ने साल 2015 में बैंक की अच्छी पगार वाली नौकरी छोड़कर पाली हाउस में जैविक खेती (Organic farming) की शुरुआत की थी। उनका कहना है कि महंगी और मेहनत से तैयार उत्पाद को मूल्य नहीं मिलना और बाजार की कमी भी एक चिंता है, जो किसानों को जैविक खेती की ओर अग्रसर नहीं होने देती है। सरकार बहुत ज्यादा कुछ नहीं कर सकती, किसानों को संगठित होने की जरूरत है। इटारसी में जैसे जैविक बाजार की परिकल्पना साकार हुई, वैसा अन्य जगह करने की जरूरत है। किसान प्रतीक शर्मा मानते हैं कि एफपीओ अच्छा विकल्प हो सकता है। सरकार जबरदस्ती करे तो इसमें सफलता नहीं मिलेगी। ये अच्छा कंसेप्ट है। हम किसान एकजुट होकर देश के अन्य राज्यों में अपने उत्पाद भेज सकते हैं।

ये कहते हैं विशेषज्ञ :

Hemant Dubey
हेमंत दुबे, जैविक बाजार के नेतृत्वकर्ता और कृषक (Hemant Dubey, Farmers)

जहरमुक्त उत्पाद की पहल
आज जैविक खेती को अपनाना किसानों की जरूरत है। ग्राम सेवा समिति रोहना-निटाया ने शहर में जैविक बाजार के माध्यम से आमजन तक जैविक उत्पाद पहुंचाने की कोशिश की है, और इसमें काफी हद तक सफल हुए हैं। आमजन को जहर रहित उत्पाद अपनाने के लिए हम पहल कर रहे हैं। लॉकडाउन से जैविक बाजार बंद था। संभवत: जनवरी से इसे पुन: प्रारंभ करके लोगों को जैविक खाद्यपदार्थ उपलब्ध करायेंगे।

Kashmir Singh Uppal
प्रो. कश्मीर सिंह उप्पल, सेवानिवृत्त प्राचार्य, मार्गदर्शक (Pro. Kashmir Singh Uppal, Retired Principal)

फैमिली किसान बनायें
जून 2019 में जैविक बाजार की शुरुआत की थी। लॉकडाउन के कारण बंद करना पड़ा है। स्थिति सुधरने पर जनवरी से पुन: प्रारंभ करने का प्रयास है। बाजार लगाना उद्देश्य नहीं लेकिन इसके माध्यम से उपभोक्ता और किसान सीधे जुड़े, यह प्रयास है। जैसे फैमिली डॉक्टर होते हैं, फैमिली किसान बनायें और जहरमुक्त खानपान से खुद को बड़े रोगों से बचाएं जो आजकल जहरीली खेती से उत्पन्न अनाज खाकर हो रहे हैं।

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