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तहसीलदार के नोटिस से जनता दुकानदारों पर फिर संकट

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अधिवक्ता के साथ जाकर तहसीलदार को बतायी वस्तुस्थिति

इटारसी। जनता बाजार की 56 दुकानों को अतिक्रमण बताकर तहसीलदार के नोटिस के बाद आज व्यापारियों ने अपने अधिवक्ता रमेश के साहू (Advocate Ramesh k Sahu) के साथ तहसीलदार से मुलाकात की। व्यापारियों का तर्क है कि वे पिछले 70 वर्षों से अस्थायी पट्टे पर काबिज होकर व्यापार कर रहे हैं, अब प्रशासन हमें अतिक्रमणकारी बताकर बेदखल करने का षडय़ंत्र कर रहा है, यदि ऐसा होता है तो हमारा तो कारोबार ही चौपट हो जाएगा। दुकानदारों को तहसीलदार ने 22 जुलाई को नोटिस जारी किए, 30 जुलाई की दोपहर तक व्यापारियों को नोटिस मिले, और 31 जुलाई न्यायालय अवकाश के दिन महज 18 घंटे में जबाव मांगा गया है।
शहर के मुख्य बाजार में नजूल भूखंड पर संचालित जनता बाजार की 56 दुकानों की बेदखली मामले में नया मोड़ आ गया है। पिछले दिनों तहसीलदार न्यायालय ने सभी दुकानदारों को नोटिस जारी कर उन्हें अतिक्रमणकारी मानते हुए दुकानों की जगह खाली करने को कहा था। नोटिस जारी होने के बाद से ही यहां काबिज व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। सोमवार को जनता दुकानदार संघ के व्यापारियों ने अपने अधिवक्ता रमेश के साहू के साथ तहसीलदार को मामले में उच्च न्यायालय से उन्हें मिले स्थगन एवं स्थाई पट्टे को लेकर दी गई एडवाइजरी का हवाला देते हुए नोटिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले 70 सालों से हम यहां अस्थाई पट्टे पर काबिज होकर व्यापार कर रहे हैं, प्रशासन हमें अतिक्रमणकारी बताकर हटाने का षड्यंत्र कर रहा है, इससे कारोबार चौपट हो जाएगा।
दुकानदारों का कहना है कि नजूल की बेशकीमती जगह में से मात्र 10 हजार फुट पर दुकानदार काबिज हैं, यदि प्रशासन बाकी जगह का उपयोग करना चाहता है तो हमें लिखित रूप से पत्र देकर सारी कच्ची दुकानों को नए मार्केट के रूप में विकसित कर स्थाई पट्टे देकर बाकी जगह का दूसरा उपयोग करे, इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन, प्रशासन हमें यहां से बेदखल कर हमारा रोजगार छीनने का प्रयास कर रहा है। कोविड में व्यापारियों की हालत खराब है, बारिश में अचानक नोटिस देकर प्रशासन व्यापारियों को प्रताडि़त कर रहा है।

यह है मामला
दुकानदारों के अधिवक्ता रमेश के साहू ने बताया कि करीब ७० सालों से ६० हजार फुट जगह में से सिर्फ १०६०० वर्गफुट नजूल भूखंड पर कच्ची दुकानें बनाकर करीब ५६ दुकानदार यहां व्यापार कर रहे हैं। पहले शासन किराया जमा करता था, बंद होने पर सभी व्यापारी ऑनलाइन मासिक किराया जमा कर रहे हैं। पूर्व में भी इस बाजार पर संकट आया था तो जनता दुकानदार संघ ने स्थाई पट्टों के लिए उच्च न्यायालय में अपील की। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को स्थाई पट्टे मंजूर करने की अपील करने ओर सरकार को समय तय कर दुकानदारों की समस्या के निराकरण को कहा। अधिवक्ता का कहना है कि कोर्ट के आदेश में निराकरण न होने तक किसी भी दुकानदार को बेदखल न करने का स्थगन दिया है। कलेक्टर कोर्ट में दुकानदारों के स्थाई पट्टे के आवेदन लंबित हैं। कोविड काल में कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि फिलहाल किसी तरह की बेदखली या अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई न की जाए, इसके बावजूद तहसीलदार ने नोटिस जारी किये, इसकी जानकारी मांगी है, साथ ही उन्हें मामले की वस्तुस्थति से अवगत कराया है।

इनका कहना है…
स्थाई पट्टे देने के संबंध में हाईकोर्ट ने राज्य को अपील करने एवं निराकरण तक बेदखली की कार्रवाई न करने का स्थगन दिया था। प्रकरण में अचानक तहसीलदार न्यायालय ने नोटिस जारी कर दिए। कलेक्टर कार्यालय में सभी दुकानदारों के प्रकरण लंबित हैं, ऐसे में दोबारा न्यायालय में जाने का विकल्प खुला है। प्रशासन से पूछा गया है कि किसके प्रतिवेदन पर अचानक बेदखली के नोटिस जारी किए गए हैं।
रमेश के साहू (Ramesh K Sahu, Advocate Janata Shopkeepers Association)

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