---Advertisement---

श्री राम लीला विशेष : यादे होशंगाबाद, इटारसी की

By
On:
Follow Us

भगवान श्री राम के अदभुत जीवन चरित्र की प्रेरणा

– पंकज पटेरिया :
प्रद भव्य प्रस्तुति है, श्री राम लीला, जिसके मंचन की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। देशभर के साथ थाईलेंड, कनाडा, श्रीलंका, नेपाल, सूरीनाम, लाओस, मॉरीशस आदि देशों में राम लीला मनाई जाती है। काशी की राम नगर की राम लीला विश्व भर में प्रसिद्ध है, तो छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के टेका पार गांव की लडकिया 50 बरसो से ज्यादा समय से रामलीला मंचन करती आ रही है। बहरहाल हमारे जिले होशंगाबाद और इटारसी के सौ बरस के राम लीला महोत्सव की दिलचस्प अनूठी यादे है, जो आज भी पुलकित कर देती है।

itarsi ramleela

इटारसी की रोचक रामलीला
रेलवे के प्रमुख जंक्शन इटारसी में 1955-60 में लालटेन युग था। रेलवे छोड़ कही बिजली नहीं थी। साधन-सुविधा का अभाव लेकिन गजब उत्साह से भरे लोग इस लोक उत्सव में आत्मप्रेरणा से आगे आकर रामलीला उत्सव में सहयोग करते थे। इस रामलीला उत्सव के कर्ताधर्ता मुख्य सूत्रधार साधु पुरूष सेठ बब्बू भैया होते थे (सेठ रमेशचन्द्र जी) उनकी भक्ति, भाव, धर्म, शीलता अदभुत थी। द्वारकाधीश बड़े मन्दिर में दो कमरे में साज समान, पोशाके रखी होती थी और स्वरूपओ का सिंगार सर भैया गुरु जी, उनका सहयोग चेतराम जी, राज राम आदि करते थे। मुझे ओर मेरे बड़े भाई शरद पटेरिया (रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर) को भी विभिन्न स्वरूप पात्र का अभिनय करने का सौभाग्य उस दौर में मिलता रहा। बब्बु भैया के पुत्र तीसरी लाइन निवासी व्यवसाई  महेश अग्रवाल ने बताया निस्वार्थ भाव से महेश पगारे, पण्डित लक्ष्मी नारायन, कुंजीलाल पटेल, कैलाश शर्मा, कपूर साहब आदि पात्रों का जीवंत अभिनय करते थे। परशुराम जी ओर रावण की भूमिका अदा करने वाले लोग प्राण फूंक देते थे। जोश खरोश में इतनी जोर से पैर पटकते की मजबूत तख्त टूट जाता था।

7b1684dc 39f5 46f8 8498 1915986dc26c

पांव पखराई, झूठी प्रसादी
श्री दुर्गा मंदिर में राज गद्दी पांव पखराई का स्नेहहिल वातावरण में भव्य आयोजन होता था, स्वरूपो को साक्षात मानकर चरण पूजे जाते, श्रद्धालुजन दक्षिणा आभूषण भेंट करते थे। अगर बाल समाज के घरो में न्योता होता था, आग्रह पूर्वक स्वरूप की झूटी भोजन सामग्री प्रसादी रूप में प्रेम पूर्वक लोग ग्रहण करते थे।

hoshangabad ramleela 1

होशंगाबाद की राम लीला
इसी तरह होशंगाबाद की राम लीला महोत्सव की शुरुआत जानकी सेठानी करीब सौ साल पहले की आज भी उनके परिवार के सदस्य उसी गरिमा, आस्था के साथ रामलीला आयोजन करते है। विधायक ओर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा के अग्रज पूर्व विधायक पण्डित गिरजाशंकर शर्मा रामलीला समिति के अध्यक्ष है। उनके निर्देशन में कमेटी सदस्य संयोजक मुन्नू दुबे आदि बहुत सुचारू रूप से संचालित करते आ रहे। मठ मंदिर समिति अध्यक्ष डॉ. गोपाल प्रसाद खद्दर के पिता स्वश्री दामोदर प्रसाद जीखद्दर चार दशक तक गणेश जी ओर अन्य पात्र की भूमिका करते रहे। उनके बाद डॉ. खद्दर फिर उनके अनुज निर्वाह करते आर रहे है। लेखक पण्डित विश्व बन्धु द्रिवेदी उनके अनुज राम नरेश वर्षों से भरत का रोल करते रहे। उनके स्व पिताश्री राम नाथ जी ओर बारह माह नर्मदा स्नान करने वाली माताजी स्व. रामकली जी स्वरूप को घर आमंत्रित कर पूजन आरती करती, भोजन कराकर वही प्रसादी प्रेम पूर्वक ग्रहण करती। साक्षात ईश्वर रूप में पूजन आरती भेंट प्रसादी की परम्परा होशंगाबाद में भी इटारसी की तरह है। पण्डित लक्ष्मी नारायन तिवारी, चोखे लाल, पण्डित भगवान शुक्ला, गणेश शर्मा, प्रमोद दुबे, पण्डित दुर्गाशंकर तिवारी, अजय परसाई, विजय परसाई, अश्वनी दुबे आदि ऐसे नाम है, जो अपने प्रभावी अभिनय के कारण आज भी याद किए जाते है। सबसे बड़ी बात एक शालीन मुस्लिम परिवार के तीसरी पीढ़ी के सदस्य उसी समर्पण भाव से रावण के पुतले तैयार करते आ रहे है। सांप्रदायिक सदभाव की यह मिसाल भी इटारसी होशंगाबाद की विरासत है।

Pankaj Pateriya e1601556273147

पंकज पटेरिया (Pankaj Pateria) वरिष्ठ पत्रकार कवि
संपादक,शब्द ध्वज ,ज्योतिष सलाहकार
9893903003,9407505391

For Feedback - info[@]narmadanchal.com
Join Our WhatsApp Channel

Leave a Comment

error: Content is protected !!
Narmadanchal News
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.