इटारसी। नगर में चल रहे श्रीरामलीला दशहरा महोत्सव के तहत, आज शहर के दो प्रमुख स्थानों पर प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़ी मार्मिक और वीरता भरी कथाओं का मंचन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोनों ही स्थानों पर रामलीला का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
सीता हरण और शबरी मिलन
बारिश के कारण गांधी मैदान गीला हो जाने से श्री द्वारिकाधीश मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में श्री बालकृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों ने आज की कथा का मंचन किया। इन प्रमुख प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया।
- अत्रि-अनसुइया मिलन : भगवान श्रीराम का अत्रि ऋषि और माता अनुसूइया से मिलन हुआ। माता अनुसूइया ने सीताजी को नारी धर्म का उपदेश दिया।
- राक्षसों से मुक्ति का संकल्प : भगवान राम ने राक्षसों से पृथ्वी को मुक्त करने का दृढ़ संकल्प लिया।
- पंचवटी निवास : राम, लक्ष्मण और सीता का पंचवटी में निवास और वहां की सुंदर लीलाओं का मंचन किया गया।
- शूर्पणखा और सीता हरण : लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटना, जिसके बाद भयंकर युद्ध में खर-दूषण वध हुआ। इसके बाद कपट से रावण द्वारा सीता हरण का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने भक्तों को भावुक कर दिया।
- शबरी मिलन : रामलीला का समापन भक्त शबरी के मिलन से हुआ, जहां प्रभु श्रीराम ने उनके प्रेमपूर्वक जूठे बेर खाकर, भक्ति की महिमा को स्थापित किया।
नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पंकज चौरे और उनकी परिषद के पार्षद प्रतिदिन भगवान का पूजन करने और कलाकारों का उत्साह बढ़ाने पहुंच रहे हैं।
दशरथ मरण और खर-दूषण वध
पुरानी इटारसी के वीर सावरकर मैदान में श्री जगदंबा मंडल के कलाकारों ने भी आज कई महत्वपूर्ण कथाओं का मंचन किया। यहां सबसे पहले केवट संवाद का मंचन हुआ, जिसमें केवट द्वारा प्रभु के चरणों को धोकर नाव में बैठाने का भक्तिमय प्रसंग दर्शाया गया। इसके बाद, चित्रकूट आगमन और अयोध्या में महाराज दशरथ के मरण का करुण दृश्य दिखाया गया।
अगले प्रसंग में, भरत जी का आगमन और उनका राम को वापस अयोध्या ले जाने का प्रयास दिखाया गया। रामलीला का मंचन अनुसूइया संवाद, पंचवटी निवास, शूर्पणखा की नाक काटना और खर-दूषण वध के साथ संपन्न हुआ। दोनों ही स्थानों पर मंचित रामलीला ने भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने और प्रभु श्रीराम के आदर्शों का पालन करने की प्रेरणा दी।









