- अखिलेश शुक्ला

10 अक्टूबर का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की एक ऐसी लीजेंड को याद करने का दिन है जिसने अदाकारी की परिभाषा ही बदल दी। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रेखा जी की। इस साल वह 71 साल की हो गई हैं, लेकिन उनकी एनर्जी, उनकी चमक और उनकी एक्टिंग का जादू आज भी वैसा ही बरकरार है। उन्हें देखकर यही लगता है कि उम्र तो बस एक नंबर है, जबकि हुनर और स्टाइल हमेशा जवान रहते हैं।
आइए, आज उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर हम उनकी जिंदगी और उनकी कुछ सबसे यादगार फिल्मों की सैर करते हैं, जिन्होंने उन्हें सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक ‘इंस्टीट्यूट’ बना दिया।
वो शुरुआत जो संघर्षों से भरी थी
रेखा का जन्म 10 अक्टूबर, 1954 को चेन्नई में हुआ था। उनका असली नाम भानुरेखा गणेशन है। पिता जेमिनी गणेशन (मशहूर तमिल अभिनेता) और माँ पुष्पावली (तेलुगु अभिनेत्री) होने के बावजूद उनका बचपन आसान नहीं था। माता-पिता के अलगाव और आर्थिक तंगी के चलते, महज 13 साल की उम्र में ही उन्हें फिल्म इंडस्ट्री का रुख करना पड़ा। तेलुगु फिल्म “रंडेल मरंडी” (1966) से शुरुआत करके वह हिंदी सिनेमा में “अनवर” (1967) से आईं, लेकिन असली पहचान “गौस्त” (1973) ने दिलाई।
फिल्मोग्राफी: वो भूमिकाएँ जिन्होंने बनाया इतिहास
रेखा ने कभी भी आरामदायक भूमिकाएं नहीं चुनीं। उन्होंने हर बार एक नई चुनौती को स्वीकार किया और उसे अमर बना दिया। आइए उनकी कुछ ऐतिहासिक फिल्मों पर गहराई से नजर डालते हैं।
1. उमराव जान (1981): वो भूमिका जो मील का पत्थर साबित हुई
अगर रेखा का नाम लें और ‘उमराव जान’ का जिक्र न हो, यह हो ही नहीं सकता। मुजफ्फर अली की इस कालजयी फिल्म में रेखा ने एक तवायफ और शायरा उमराव जान का किरदार निभाया। यह सिर्फ एक भूमिका नहीं थी, बल्कि पर्दे पर कविता थी। उनकी आँखों में दर्द था, उनके अंदाज में नफासत थी और उनकी शायरी में जिंदगी का सार। इस भूमिका के लिए उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) जीता। यह फिल्म आज भी उनकी सबसे प्रशंसित फिल्मों में शुमार है।
2. खूबसूरत (1980): कॉमेडी में भी था जलवा
रेखा को ड्रामा की रानी माना जाता है, लेकिन उन्होंने “खूबसूरत” में अपने हास्य अभिनय से सबको चौंका दिया। राकेश रोशन की इस फिल्म में उन्होंने ट्विन सिस्टर्स का किरदार निभाया – एक शराबी और ठुमकती-चलने वाली और दूसरी संजीदा और समझदार। इस रोल के लिए उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। यह फिल्म साबित करती है कि रेखा कितनी वर्सटाइल अदाकारा थीं।
3. सिलसिला (1981): रहस्य और रोमांस का अनसुलझा सवाल
यश चोपड़ा की इस सुपरहिट फिल्म ने रेखा को एक अलग ही आयाम दिया। अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी के साथ इस लव ट्रायंगल स्टोरी में रेखा ने ‘चंदनी’ का किरदार निभाया। उनकी केमिस्ट्री अमिताभ के साथ जबर्दस्त थी और फिल्म के गाने आज भी लोकप्रिय हैं। हालाँकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतनी सफल नहीं रही, लेकिन इसके पीछे की कहानियाँ और रेखा-अमिताभ का रहस्यमयी रिश्ता आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
4. मुकद्दर का सिकंदर (1978): दोस्ती और इश्क की दास्तान
इस सुपरहिट फिल्म में रेखा ने ‘कामना’ का किरदार निभाया, जो सिकंदर (अमिताभ बच्चन) के प्रति अपने प्यार को दबाए रखती है। रेखा की मासूमियत और अभिव्यक्ति ने उसे यादगार बना दिया। रेखा और अमिताभ की जोड़ी इस फिल्म में भी दर्शकों के दिलों पर छा गई।
5. मिस्टर नटवरलाल (1979): सुपरस्टार के साथ जादू
इस फिल्म में रेखा ने अमिताभ बच्चन के हीरोइन की भूमिका निभाई, जहाँ अमिताभ ने ट्विन ब्रदर्स का रोल किया था। फिल्म में रेखा का ग्लैमरस अवतार और उनकी एक्टिंग काफी सराही गई। यह फिल्म उस दौर की उनकी एक और बड़ी हिट साबित हुई।
6. खेलाड़ियों का खिलाड़ी (1996): विलेन का रोल भी किया कमाल
यह फिल्म रेखा के करियर का एक और टर्निंग पॉइंट थी। उन्होंने एक खूंखार गैंगस्टर ‘माया’ का किरदार निभाया। अपनी गहरी आवाज और दबंग अंदाज से उन्होंने इस एंटी-हीरो रोल में भी जान डाल दी और साबित कर दिया कि एक अच्छी अभिनेत्री किसी भी रोल को अपना बना सकती है।
7. लज्जा (2001): सशक्त महिला का प्रतीक
राजकुमार संतोषी की इस फिल्म में रेखा ने ‘राधिका’ का किरदार निभाया, जो एक ऐसी महिला है जो पुरुष प्रधान समाज में औरतों के हक की लड़ाई लड़ती है। उनके डायलॉग और उनकी एक्टिंग ने उस दौर में महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश दिया।
8. उत्सव (1984): महाभारत की आधुनिक व्याख्या
गिरीश कर्नाड की इस फिल्म में रेखा ने एक नटखट और शरारती ‘मदनिका’ (जो द्रौपदी का प्रतीक है) का किरदार निभाया। यह फिल्म अपने समय से आगे की सोच रखती थी और रेखा ने इस जटिल किरदार को बखूबी निभाया।
9. आस्था (1997): जटिल रिश्तों की गहराई
इस फिल्म में रेखा ने एक ऐसी औरत का किरदार निभाया जो अपनी जिंदगी के संघर्षों और रिश्तों की जटिलताओं से जूझती है। यह एक गंभीर और अलग तरह की फिल्म थी जिसमें रेखा के अभिनय को फिर से सराहा गया।
10. कोई मिल गया (2003) और क्रिश (2006): नए दौर में भी बनाई जगह
रेखा ने नए जमाने की साइंस-फिक्शन और सुपरहीरो फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। “कोई मिल गया” में उन्होंने ऋषि कपूर की पत्नी का रोल निभाया और “क्रिश” में प्रीति जिंटा की माँ का। इन फिल्मों ने साबित किया कि रेखा हर दौर के साथ आसानी से तालमेल बिठा सकती हैं।
स्टाइल आइकन और व्यक्तिगत जीवन
रेखा सिर्फ एक अदाकारा ही नहीं, बल्कि एक स्टाइल आइकन भी रही हैं। उनकी साड़ियाँ, उनकी बिंदी और उनके मेकअप ने हमेशा ट्रेंड सेट किए। वह अपनी निजी जिंदगी को लेकर हमेशा चुप रही हैं, जिसने उनके आस-पास एक रहस्य का आवरण बना दिया है। उनका नाम कई बार विवादों में भी रहा, लेकिन उन्होंने कभी किसी को जवाब देने की जरूरत नहीं समझी। उनका पूरा फोकस हमेशा अपने काम पर रहा।
निष्कर्ष: एक ऐसी शख्सियत जिसने दिया हर भूमिका को नया आयाम
रेखा का सफर सिर्फ एक एक्ट्रेस का सफर नहीं है। यह एक ऐसी महिला की कहानी है जिसने हर मुश्किल का डटकर सामना किया और अपने हुनर के दम पर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने साबित किया कि उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है और प्रतिभा कभी नष्ट नहीं होती। 71 साल की उम्र में भी वह उतनी ही एनर्जेटिक, स्टाइलिश और प्रासंगिक हैं।
उनकी फिल्में आज भी हमें एक बेहतरीन कलाकार की ताकत दिखाती हैं। वह सच में हिंदी सिनेमा की एक अनमोल धरोहर हैं। तो आइए, हम सब मिलकर इस बेमिसाल अदाकारा को उनके 71वें जन्मदिन की ढेर सारी बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह इसी तरह हमें अपनी मौजूदगी से नवाज़ती रहेंगी।
अखिलेश शुक्ला
सेवा निवृत्त प्राचार्य , लेखक ब्लॉगर










