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रेस्ट हाउस भूमि नीलामी: हाई कोर्ट में याचिका खारिज

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इटारसी/जबलपुर। हाईकोर्ट जबलपुर (High Court Jabalpur) ने इटारसी रेस्ट हाउस की भूमि विक्रय के विरुद्ध लगायी याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका आधा दर्जन लोगों ने रेस्ट हाउस की एक लाख वर्ग फुट भूमि बेचे जाने के विरुद्ध लगाई थी।
रेस्ट हाउस की भूमि 31 करोड़ में नीलाम करने के विरुद्ध कांग्रेस नेता (Congress leader) और पत्रकार इटारसी मुकेश गांधी, नगर कांग्रेस अध्यक्ष पंकज राठौर, कांग्रेस नेता मोहन झालिया, ज्ञानेंद्र उपाध्याय, कैलाश नवलानी, एवं प्रज्ञान साहू ने उच्च न्यायालय में लगायी थी। यह भूमि त्रिपुरी बिल्डकॉन होशंगाबाद द्वारा खरीदी गई है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर (Madhya Pradesh High Court Jabalpur) के मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमथ एवं न्यायाधीश विशाल धगट की बेंच में रेस्ट हाउस मामले में मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा, हम याचिका में कोई योग्यता नहीं पाते हैं। याचिकाकर्ताओं की शिकायत यह है कि आरक्षित मूल्य के रूप में 25 करोड़ रुपये की राशि के लिए निर्धारित बिक्री मूल्य बहुत कम है। याचिकाकर्ताओं ने ऐसा माना है कि इस संपत्ति की बाजार दर लगभग 130 करोड़ रुपये होगी। इसलिए, 130 करोड़ रुपये की संपत्ति को केवल 31 करोड़ रुपये में बेचना गलत है।

न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के इस अनुरोध को भी नहीं माना कि जमीन की नीलामी एक बार पुन: की जाए न्यायालय ने कहा की हम इसे उचित नहीं समझते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि यदि संपत्ति को फिर से बोली के लिए रखा जाता है, तो संपत्ति अधिक राशि प्राप्त करेगी। इस बात की पूरी संभावना है कि दूसरी बोली में संपत्ति को 31 करोड़ रुपये भी न मिले। अगर ऐसा होता है तो राजकोष को इतने पैसे का नुकसान होगा। इसलिए, दूसरी नीलामी में जाने का जोखिम उठाना उचित नहीं होगा।

याचिका कर्ताओं का मानना है कि इस संपत्ति से 130 करोड़ रुपये मिलेंगे। केवल एक ही व्यक्ति ने इसके लिए बोली लगाई। निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 27.07.2021 थी। आज तक कोई भी व्यक्ति संपत्ति के लिए बोली लगाने आगे नहीं आया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता से यह पूछे जाने पर कि क्या कोई बोलीदाता है, जो इस संपत्ति को खरीदने का इच्छुक है, उनका कहना है कि इस समय कोई बोली लगाने वाला नहीं है। इसलिए, हमारा विचार है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उद्धृत किए आंकड़े को संपत्ति की वास्तविक लागत के रूप में स्वीकार करना उचित नहीं हो सकता है और कोई अन्य बोलीदाता नहीं है जो आज की तारीख में भी बेहतर राशि की पेशकश कर रहे हैं। हमें कार्यवाही को रोकने का कोई आधार नहीं मिलता है। इसलिए याचिका खारिज की जाती है। ऐसे में अब याचिकाकर्ता आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

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