इटारसी। साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर अपना सब कुछ गंवा देने वाली एक 22 वर्षीय युवती को इटारसी रेलवे सुरक्षा बल ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित बचा लिया। भुसावल की रहने वाली यह युवती ठगी के डर से बिना बताए घर से निकल गई थी, जिसे आरपीएफ ने ट्रेन से उतारकर उसके पिता के सुपुर्द किया।
ऐसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
9 जनवरी 2026 को आरपीएफ भोपाल के वरिष्ठ मण्डल सुरक्षा आयुक्त डॉ. अभिषेक को सूचना मिली कि भुसावल की एक युवती घर से लापता है और किसी ट्रेन में सवार हुई है। इटारसी आरपीएफ पोस्ट प्रभारी मनीष पाण्डेय ने तुरंत टीम गठित की। भुसावल आरपीएफ से सीसीटीवी फुटेज साझा किए गए, जिससे पता चला कि युवती ट्रेन नंबर 12165 रतलाम-वाराणसी एक्सप्रेस के आगे वाले जनरल कोच में सवार हुई है। जैसे ही शाम करीब 6 बजे ट्रेन इटारसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर पहुंची, उपनिरीक्षक ओपी गुर्जर, आरक्षक हरेंद्र कुमार और महिला प्रधान आरक्षक रानू विश्वकर्मा ने युवती को पहचान लिया और सुरक्षित उतारकर पोस्ट पर ले आए।
ठगी की खौफनाक दास्तां
पूछताछ में युवती घनिष्ठा चौधरी ने अपनी आपबीती सुनाई, जो किसी के लिए भी एक बड़ा सबक है। शुरुआत में इंस्टाग्राम पर एक वर्क फ्रॉम होम लिंक दिखा, जिस पर युवती ने अपनी बैंक डिटेल्स और मोबाइल नंबर रजिस्टर किया। युवती को टेलीग्राम पर अनन्या नाम की महिला ने छोटे टास्क दिए। शुरुआत में 100 रुपए इन्वेस्ट करने को कहा गया। झांसा देने के लिए अपराधियों ने एक फर्जी पोर्टल पर युवती का प्रॉफिट बढ़ता हुआ दिखाया, लेकिन पैसा निकालने के लिए और निवेश की शर्त रखी। धीरे-धीरे निवेश 100 से बढ़कर हजारों में पहुंच गया।
युवती ने अपने, अपने पिता और दोस्तों के खातों से करीब 2.5 लाख रुपय अपराधियों के बताए यूपीआई लिंक पर ट्रांसफर कर दिए। जब युवती ने पैसे वापस मांगे, तो उससे कुल राशि का 10 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। पैसे खत्म होने और ठगी के डर से वह इतनी घबरा गई कि स्कूटी छोड़कर ट्रेन में बैठकर भाग निकली। आरपीएफ ने रात में ही युवती के पिता को इटारसी बुलाया। कागजी कार्रवाई और तस्दीक के बाद महिला आरक्षक प्रज्ञा और रानू विश्वकर्मा की मौजूदगी में युवती को उसके पिता को सौंप दिया गया।








