- कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा मामला, सुमित सेलुकर ने सौंपी पूर्व की शिकायतों की फाइलों के साथ नई अर्जी
रितेश राठौर, केसला। आदिवासी विकासखंड केसला, जहां जनपद पंचायत से लेकर शिक्षा विभाग के तमाम बड़े कार्यालयों का जमावड़ा है, वहीं के बच्चे शिक्षा का अधिकार के लाभ से वंचित हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पोर्टल न खुलने और तकनीकी खामियों के कारण अनेक पात्र बच्चे निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश से महरूम रह गए। अब यह मामला शिकायतों के लंबे दौर के बाद कलेक्टर नर्मदापुरम की जनसुनवाई में पहुंचा है।
कार्यालयों के नाक के नीचे अंधेरा
हैरानी की बात यह है कि ग्राम केसला में ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जनपद शिक्षा केंद्र और आदिवासी विकासखंड कार्यालय स्थित हैं। इसके बावजूद क्षेत्र के गरीब और आदिवासी परिवारों को योजना की सही जानकारी और समय पर आवेदन का मौका नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की नाक के नीचे चल रही इस अव्यवस्था ने मासूमों का भविष्य दांव पर लगा दिया है।
जनसुनवाई में खुली शिकायतों की फाइल
ग्रामीण प्रतिनिधि सुमित कुमार सेलुकर ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि यह कोई पहली शिकायत नहीं है। इससे पहले भी जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी को कई बार लिखित आवेदन दिए गए। जनपद पंचायत और बीआरसी कार्यालय में भी चक्कर काटे गए। लेकिन हर बार आश्वासनों के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। सुमित ने ज्ञापन के साथ उन सभी पुराने आवेदनों की छायाप्रतियां भी संलग्न की हैं, जो अब तक की प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रमाण दे रही हैं।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
पोर्टल की समीक्षा : पिछले सत्र में पोर्टल न खुलने के कारणों की जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
- समय पर प्रक्रिया : आगामी सत्र के लिए पोर्टल समय पर खोला जाए ताकि आदिवासी परिवारों को आवेदन का पर्याप्त समय मिले।
- सीटों में वृद्धि : जनसंख्या और क्षेत्र की पिछड़ी स्थिति को देखते हुए आरटीई के तहत सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
- व्यवस्था में सुधार : आदिवासी क्षेत्रों में विशेष जागरूकता शिविर लगाए जाएं।
आवेदक सुमित कुमार सेलुकर ने कहा कि यह आवेदन किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उम्मीद है कि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद अब व्यवस्था में सुधार होगा।









