इटारसी। सिद्धार्थ आर्य वेलफेयर फाउंडेशन के डायरेक्टर सिद्धार्थ आर्य ने शहर की न्यास कॉलोनी और समरस्ता नगर में व्याप्त नारकीय स्थितियों को लेकर नगर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने वार्ड की मूलभूत समस्याओं को उठाते हुए नगर पालिका प्रशासन को एक माह का अल्टीमेटम दिया है।
ये नाला नहीं, पीने के पानी का रास्ता है

प्रेस वार्ता के दौरान एक पोस्टर विशेष रूप से चर्चा का विषय रहा, जिसमें गंदी बुदबुदाती नाली के बीच से गुजरती पाइपलाइन को दिखाया गया था। पोस्टर पर लिखा था— यह नाला नहीं, यह हमारे पीने के पानी का रास्ता है। सिद्धार्थ आर्य ने कहा कि पाइपलाइनें नालियों के अंदर डूबी हुई हैं, जिससे घरों में दूषित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने मांग की कि इंदौर की हालिया स्वास्थ्य घटनाओं से सबक लेते हुए इन पाइपलाइनों को तत्काल नाली से बाहर निकालकर ऊपर किया जाए।
26 जनवरी से आंदोलन का शंखनाद
सिद्धार्थ आर्य ने स्पष्ट किया कि स्थानीय पार्षद के प्रयासों के बावजूद प्रशासन की उदासीनता के कारण अब फाउंडेशन ने कमान संभाली है। उन्होंने कहा सबसे पहले नगर पालिका और फिर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 26 जनवरी के बाद से चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा। यदि एक माह में सुधार नहीं हुआ, तो उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
सीसीटीवी के नाम पर केवल रस्म अदायगी
न्यास बायपास पर कचरा डंपिंग को लेकर नगर पालिका द्वारा लगाए गए बोर्ड पर भी उन्होंने तंज कसा। उन्होंने फोटोग्राफ दिखाते हुए कहा कि वहां केवल बोर्ड लगा है कि आप सीसीटीवी की निगरानी में हैं, जबकि मौके पर कोई कैमरा नहीं है। उन्होंने इसे प्रशासन की केवल कागजी खानापूर्ति करार दिया।
महिलाओं ने सुनाई व्यथा
प्रेस वार्ता में वार्ड की दो दर्जन से अधिक महिलाएं भी मौजूद रहीं। उन्होंने धाराप्रवाह अपनी समस्याएं रखते हुए बताया कि वार्ड में सफाई व्यवस्था ठप है, कचरा गाडिय़ां नियमित नहीं आतीं और स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। गंदे पानी की आपूर्ति के कारण क्षेत्र में बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है।









