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शीत-घात पर राज्य ने दिये लोगों को जागरुक करने निर्देश

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नर्मदापुरम। शीत लहर (Cold Wave) का प्रभाव प्रत्येक वर्ष दिसंबर-जनवरी के महीनों में होता है और कभी-कभी विस्तारित शीत लहर की घटनाएं नवंबर से फरवरी तक होती है।

शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्याधिक कम होने (शीत लहर) के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव जैसे सर्दी जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाईपोथर्मिया (Hypothermia), अस्थमा (Asthma), एलर्जी (Allergy) होने की आशंका बढ़ जाती हैं, एवं यदि समय पर नियंत्रण न किया जाये, उस स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है। उक्त प्रभावों से पूर्व बचाव हेतु समयानुसार उचित कार्यवाही की जाने की स्थिति में प्राकृतिक विपदा का सामना किया जा सकता है।

प्रभावी शीत लहर प्रबंधन हेतु स्वास्थ्य कर्मियों, जनसाधारण आदि को संबंधित विषय में जागरूक किया जाना आवश्यक है, ताकि शीत घात की आपदा के समय होने वाले रोगों से मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानि पर यथासंभव रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

शीत से बचाव के उपाय

शीत से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें, घर में ठंडी हवा प्रवेश न हो इसलिए दरवाजे व खिड़की बंद रखें, सोते समय रजाई, कंबल का उपयोग करें। फ्लू या बुखार, नाक बंद होने की स्थिति में घर से बाहर न निकलें, घर में रहें, आवश्यकता पडऩे पर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक से परामर्श करें, गरम एवं ताजा भोजन, गर्म पानी का उपयोग करें, वृद्ध, बच्चे एवं गर्भवती माताओं का विशेष ध्यान रखें, लकड़ी का अलाव, सिगड़ी एवं रूम हीटर (Room Heater) का उपयोग करें। शीतघात के दौरान यथासंभव घर के अंदर रहें और ठंडी हवा बारिश बर्फ से संपर्क रोकने के लिये अनिवार्य होने पर ही यात्रा करें, शरीर को सूखा रखें, शरीर की गरमाहट बनाये रखने हेतु अपने सिर, गर्दन, कान, नाक को पर्याप्त रूप से ढकें, सूती एवं गर्म ऊनी कपड़े पहनें, शरीर की गर्मी बचाये रखने के लिए टोपी, मफलर तथा आवरण युक्त एवं जलरोधी जूतों का उपयोग करें, फेफड़ों में सक्रमण से बचाव हेतु मुंह एवं नाक ढक्कर रखें।

स्वास्थ्यवर्धक गरम भोजन का सेवन करें, शीत प्रकृति के भोजन से दूर रहें। गरम तरल पदार्थ नियमित रूप से पिएं, इससे ठंड से लडऩे के लिए शरीर की गर्मी बनी रहे। रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता में वृद्धि के लिए विटामिन सी से भरपूर ताजे फल व सब्जियां खाएं। तेल, क्रीम, जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा का मसाज करें। बुजुर्ग, नवजात शिशु तथा बच्चों का यथासंभव अधिक ध्यान रखें क्योंकि उन पर शीतऋतु का प्रभाव अधिक होता है। बच्चों व बुजुर्गों को टोपी मफलर, स्वेटर व गर्म कपड़े पहनाकर गर्म रखें। कमरे को गर्म करने के लिए कोयले का प्रयोग न करें, अगर कोयले व लकड़ी जलाना आवश्यक है तो रोशनदान का प्रयोग करें, बंद कमरे में कोयले को जलाना खतरनाक हो सकता है क्योकि यह कार्बन मोनोऑक्साईड जैसी जहरीली गैस पैदा करती है जो किसी की जान भी ले सकती है। अधिक समय तक ठंड में न रहें, शराब न पिएं, यह शरीर की गरमाहट को कम करता है। यह खून की नसों को पतला कर देता है, विशेषकर हाथों से जिसमें हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ सकता है, शीत में छतिग्रस्त हिस्सों की मालिश न करें, अचेतन अवस्था में किसी व्यक्ति को तरल पदार्थ न दें, शीत लहर, हाइपोथर्मिया से प्रभावित व्यक्ति को तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान कराएं।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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