इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026’ के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इस वर्ष की थीम ‘आर्द्र भूमि और पारंपरिक ज्ञान : सांस्कृतिक विरासत का उत्सव’ पर केंद्रित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जल और जमीन के इस मिलन स्थल को बचाने के लिए युवाओं का आह्वान किया।
तवा जलाशय: हमारे क्षेत्र की अमूल्य धरोहर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और इको क्लब प्रभारी डॉ. राधा आशीष पांडे ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत में वर्तमान में कुल 96 रामसर साइट्स (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां) हैं। उन्होंने गर्व के साथ रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश की 5 रामसर साइट्स में हमारे नर्मदापुरम का ‘तवा जलाशय’ भी शामिल है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि भारत में 14 लाख हेक्टेयर से अधिक आर्द्रभूमि है, जो हमारे पारिस्थितिक तंत्र का आधार है।
संरक्षण ही एकमात्र विकल्प : डॉ. नीता राजपूत
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से ‘पर्यावरण रक्षक’ के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। वहीं, वनस्पति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र चौधरी ने इस दिवस के ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक स्तर पर इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
प्रमुख गतिविधियां और शपथ ग्रहण
तकनीकी सत्र : डॉ. सौरभ तिवारी ने आर्द्रभूमि की जैव विविधता और इसके इतिहास पर विस्तार से चर्चा की।
शपथ ग्रहण : इको क्लब प्रभारी द्वारा सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को ‘आर्द्रभूमि संरक्षण’ एवं ‘वेटलैंड मित्र’ की शपथ दिलाई। विद्यार्थियों को आर्द्रभूमि के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों से अवगत कराया गया। संचालन डॉ. राधा आशीष पांडे ने किया, जबकि अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार डॉ. सतीश ठाकरे ने व्यक्त किया। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं महाविद्यालयीन स्टाफ उपस्थित रहा।









