इटारसी। स्थानीय पशुपतिनाथ मंदिर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास देवी रत्नमणि द्विवेदी ने ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंगों के मात्र स्मरण से ही भक्तों को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो जाती है।
भगवान शिव स्वयंभू, शाश्वत और सर्वोच्च सत्ता हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांडीय अस्तित्व के आधार माने जाते हैं।देवी रत्नमणि ने शिव पुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें देवों के देव महादेव के कल्याणकारी स्वरूप, उनके रहस्य और उपासना की विधि को विस्तार से समझाया गया है। उन्होंने बताया कि शिव पुराण में कुल 6 खण्ड और 24,000 श्लोक हैं, जो मनुष्य को भक्ति और ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं।
विशेष रूप से कोटिरुद्र संहिता में वर्णित 12 ज्योतिर्लिंगों में साक्षात भगवान शिव का वास माना जाता है, इसलिए हिंदू धर्म में इनकी पूजा का विशेष महत्व है।कथा के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में स्थित ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख किया, जिनमें गुजरात के सोमनाथ व नागेश्वर, आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर व ओंकारेश्वर, उत्तराखंड के केदारनाथ, महाराष्ट्र के भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर व घृष्णेश्वर, उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ, झारखंड के वैद्यनाथ और तमिलनाडु के रामेश्वरम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन पावन स्थलों की महिमा और कथाएं मनुष्य को संस्कारवान बनाने के साथ-साथ शिव भक्ति की ओर प्रेरित करती हैं।










