इटारसी। साल का अंतिम सप्ताह चल रहा है, लेकिन इटारसी की फिजाओं से हाड़ कंपाने वाली ठंड नदारद है। जिस समय लोग अलाव जलाकर ठिठुर रहे होते थे, उस समय लोग दिन में तीखी धूप से परेशान हैं और रातें भी अपेक्षाकृत गर्म महसूस हो रही हैं। ऐसा लग रहा है मानो सर्दी इस बार इटारसी का रास्ता ही भूल गई है।
मौसम का बदला मिज़ाज
दिसंबर के महीने में शाम ढलते ही दोपहिया वाहनों की सीटों पर जमने वाली ओस और सुबह घास पर दिखने वाली शबनम की बूंदें अब कम ही नजर आ रही हैं। बर्फीली हवाओं की गैरमौजूदगी के कारण सुबह का कोहरा भी गायब है। स्थानीय लोग इस अजीबोगरीब बदलाव से हैरान हैं, क्योंकि सामान्यत: 25 दिसंबर के आसपास पारा 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता था, जो इस बार काफी ऊपर बना हुआ है।
क्या कहता है मौसम विभाग?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस असामान्य गर्मी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं।
- वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की कमी : उत्तर भारत के पहाड़ों पर भारी हिमपात नहीं होने के कारण वहां से आने वाली ठंडी हवाएं (शीत लहर) मध्य प्रदेश के मैदानी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
- एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन : अरब सागर से आने वाली नमी के कारण हवाओं का रुख बदला हुआ है, जिससे न्यूनतम तापमान में गिरावट नहीं हो रही है।
नर्मदापुरम संभाग के लिए अगले 7 दिन
- तापमान : दिन का अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है।
- बादलों की आवाजाही : आने वाले 48 घंटों में हल्के बादल छा सकते हैं, जिससे रात के तापमान में थोड़ी और बढ़ोतरी (गर्मी) हो सकती है।
- सर्दी की वापसी : मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जनवरी के पहले सप्ताह में एक नया विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे उत्तर भारत में बर्फबारी होगी और उसके बाद ही इटारसी में कड़ाके की ठंड की एंट्री होगी।
सेहत और खेती पर प्रभाव
मौसम में अचानक आए इस बदलाव का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंड के कारण सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं, किसानों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि गेहूं की फसल के लिए कड़ाके की ठंड और ओस का होना अनिवार्य है।
विशेषज्ञ की राय : जब तक उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं का मार्ग साफ नहीं होता, तब तक तीखी धूप से राहत मिलने के आसार कम हैं। फिलहाल मौसम का यह अजीब व्यवहार ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय दबाव के बदलाव का संकेत है।






