इटारसी। कहते हैं, मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है… पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इटारसी के गांधी स्टेडियम की फिजाओं में 13 और 14 जनवरी को यही पंक्तियां हकीकत बनकर गूंजेंगी। यह सिर्फ चौके-छक्कों की जंग नहीं, बल्कि हर उस बाधा के खिलाफ एक जीत है जो इंसान को रोकने की कोशिश करती है।
एक शहर, एक दिल, सेवा और सहयोग की मिसाल
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए इटारसी के ‘नेकी के स्तंभों’ ने हाथ मिलाया है।
- श्रद्धांजलि का अनूठा स्वरूप : पत्रकार अनिल मिहानी अपने पिता स्व. किशनचंद मिहानी की स्मृति में संपूर्ण पुरस्कार प्रदान कर रहे हैं।
- समानता का परिधान : युवा व्यावसायी निपुण गोठी की ओर से 85 खिलाडिय़ों को खेल की शर्ट भेंट की जा रही है।
- आत्मीय आतिथ्य : जितेंद्र ओझा ने अग्रवाल भवन में खिलाडिय़ों के ठहरने का जिम्मा उठाया है।
- आवाज और आधार : नगर पालिका अध्यक्ष पंकज चौरे द्वारा साउंड एवं ग्राउंड की शानदार व्यवस्था की जा रही है।
- स्वाद और शक्ति : मनीष ठाकुर के सहयोग से खिलाडिय़ों के भोजन की पुख्ता व्यवस्था है।
- प्रचार का मोर्चा – गोपाल सिद्धवानी पूरे शहर में इस जज्बे की गूंज पहुंचा रहे हैं।
- सम्मान का प्रतीक : जाफर सिद्दीकी द्वारा खिलाडिय़ों के लिए सम्मान पत्र सुनिश्चित किए गए हैं।
सिर्फ खेल नहीं, एक अहसास है
जब ये दिव्यांग खिलाड़ी आपके पास आमंत्रण लेकर आएं, तो याद रखिएगा—वे आपसे आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आपके शहर का अपनापन और सम्मान मांगने आए हैं। उनकी मेहनत को आपकी तालियों की गडग़ड़ाहट चाहिए।








