इटारसी। कहते हैं कि—
परिंदों को मिलेगी मंजिल एक दिन, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं,
वही लोग रहते हैं खामोश अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं।
वर्धमान पब्लिक स्कूल के वार्षिक उत्सव ‘रंगमंच’ में कुछ ऐसा ही नजारा था, जहां लफ्ज़़ कम और बच्चों का हुनर ज़्यादा बोल रहा था। नर्सरी से कक्षा छठी तक के नन्हे फनकारों ने जब मंच संभाला, तो ऐसा लगा मानो छोटे-छोटे हाथों ने सफलता का बड़ा आसमान छू लिया हो।
सांस्कृतिक नज़ारे, कहीं भक्ति, कहीं शक्ति
कार्यक्रम का आगाज सरस्वती वंदना की पावन लौ से हुआ। इसके बाद जब नन्हें कदम ‘साउथ इंडियन’ धुन पर थिरके और ‘हॉरर सॉन्ग’ पर रोमांच पैदा किया, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
- गीता का सार : जब मंच पर महाभारत के पात्र जीवंत हुए और श्रीकृष्ण का उपदेश गूंजा, तो वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
- ममता का संगम : मां और बच्चों के ‘मदर एंड किड्स डांस’ ने हर आंख को नम और हर दिल को भावुक कर दिया।
संस्कारों की पाठशाला

विद्यालय के डायरेक्टर प्रशांत जैन के शब्दों में भी एक गहरी बात झलकी।
हम सिर्फ़ कागज़ पर ऊंचे नंबर नहीं लिखते,
हम बच्चों के चरित्र में संस्कार और आत्मविश्वास लिखते हैं।
सुश्री प्रशस्ति जैन ने सभी का आभार जताते हुए इस शाम को यादों के झरोखे में कैद किया। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं था, बल्कि वर्धमान परिवार की उस मेहनत का आईना था, जो हर बच्चे को एक ‘सक्षम व्यक्तित्व’ बनाने के लिए की जा रही है।










