- नपा ने गर्मियों में टैंकरों से पानी सप्लाई पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध
- नेता प्रतिपक्ष रफतजहां सिद्दीकी ने बताया ‘तानाशाहीपूर्ण’ आदेश
इटारसी। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी एक नए फरमान ने इटारसी में सियासी और सामाजिक गलियारों में उबाल ला दिया है। आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास ने 11 नवंबर 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दिए निर्देशों के बाद, मुख्य नगर पालिका अधिकारी इटारसी ने आदेश जारी कर ग्रीष्मकाल में ट्रैक्टर-टैंकरों से जल प्रदाय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
क्या है विवादित आदेश?
नगर पालिका इटारसी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, नगरीय प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 6 माह के भीतर शहर की जल प्रदाय व्यवस्था को पूर्णत: व्यवस्थित किया जाए। यदि ग्रीष्मकाल में टैंकरों के माध्यम से पानी का वितरण किया गया, तो संबंधित सहायक यंत्री, उपयंत्री और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाएगा। साथ ही, टैंकरों द्वारा किए गए कार्य का भुगतान भी निकाय द्वारा नहीं किया जाएगा।
जनहित के विरुद्ध है फैसला
नगर पालिका परिषद इटारसी की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती रफतजहां सिद्दीकी ने इस आदेश की घोर निंदा करते हुए इसे तानाशाही करार दिया है। उन्होंने कहा इटारसी के 34 वार्डों में से कई वार्ड ऐसे हैं जहां पाइपलाइन या स्थायी जल व्यवस्था नहीं है। हर वर्ष गर्मी में शहर में प्रतिदिन लगभग 200 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाती है, फिर भी पूर्ति नहीं हो पाती। ऐसे में टैंकर बंद करना जनता को प्यासा मारने जैसा है।
प्रमुख आपत्तियां और चिंताएं
- वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव : कई क्षेत्रों में आज भी टैंकर ही एकमात्र सहारा हैं। बिना इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए टैंकर बंद करना न्यायोचित नहीं है।
- अधिकारियों पर दबाव : निलंबन की चेतावनी के कारण अधिकारी टैंकर बुलाने से डरेंगे, जिससे संकट और गहराएगा।
- जनता की उपेक्षा : श्रीमती सिद्दीकी का आरोप है कि भारी बहुमत से बनी सरकार अब जनता के विरुद्ध ही फैसले ले रही है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है।
नगर पालिका के इस आदेश ने गर्मी आने से पहले ही शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को जीवन देने वाले आदेश जारी करने चाहिए न कि जीवन समाप्त करने वाले। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस आदेश पर पुनर्विचार करता है या शहर की जनता को इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।









