इटारसी। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वंदे मातरम गायन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गीत के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत 1882 के उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा बना और 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। इसकी धुन पहली बार 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाई थी। उन्होंने यह भी साझा किया कि राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक छंदों के गायन की मानक अवधि लगभग 65 सेकंड होती है।
डॉ. ओपी शर्मा ने बताया कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि ऊर्जा का स्रोत है जो शरीर और मस्तिष्क में देशभक्ति का संचार कर हमें कर्तव्यों के प्रति प्रेरित करता है। श्रीमती ज्योति दीवान ने विद्यार्थियों को गायन की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती श्रुति ने किया। इस अवसर पर डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. सुसन मनोहर, डॉ. अर्चना शर्मा सहित महाविद्यालय का स्टाफ और बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स उपस्थित रहे।









