इटारसी। होली की खुमारी के बीच नर्मदापुरम के खेतों में इस बार फाग गीतों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की तान भी सुनाई दे रही है। कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना के निर्देशन में जिला प्रशासन ने नरवाई प्रबंधन के लिए एक अनूठी और संगीतमय पहल शुरू की है, जिसने किसानों के बीच एक नई चेतना जगा दी है।
गीतों के जरिए ‘मिट्टी, से नाता जोडऩे की कोशिश
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इस अभियान को एक नया आयाम दिया है। कृषि प्रधान क्षेत्रों के खेतों में पहुंचकर सारिका ने अपने स्वरचित गीतों के माध्यम से किसानों को संगीत की भाषा में नरवाई न जलाने की सीख दी।
‘अब नरवाई नहीं जलाना है, धरती का स्वास्थ्य बचाना है…’ जैसे गीतों ने सीधे किसानों के दिलों पर दस्तक दी।
आग नहीं, प्रबंधन : किसानों का महा-संकल्प
अभियान के दौरान सारिका घारू ने किसानों को एकजुट कर सामूहिक शपथ दिलाई। उपस्थित अन्नदाताओं ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे फसल अवशेषों (नरवाई) को जलाने की घातक परंपरा को त्यागेंगे और इसके वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाएंगे।
क्यों जरूरी है यह अभियान?
प्रशासन की इस पहल के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं।
- मिट्टी की उर्वरता : आग से जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं, जिसे बचाना अनिवार्य है।
- वायु प्रदूषण : धुएं से होने वाली घुटन और बीमारियों पर लगाम लगाना।
- पर्यावरण सुरक्षा : जीव-जंतुओं और प्राकृतिक संपदा की रक्षा।
मुख्य क्षेत्रों पर फोकस
यह जागरूकता गतिविधियां विशेष रूप से जिले के उन क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं, जहां नरवाई जलाने की घटनाएं सर्वाधिक होती हैं। संगीत और संवाद के इस संगम ने किसानों को यह समझाने में सफलता पाई है कि फसल अवशेष कचरा नहीं, बल्कि सोना है, बशर्ते उसका सही इस्तेमाल हो।









