इटारसी। जिले के शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती समस्या और उनके काटने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अब निर्णायक कदम उठा लिया है। जिला पशु कल्याण एवं पशु क्रूरता निवारण समिति की संयुक्त बैठक में कलेक्टर सोनिया मीना ने कड़े लहजे में निर्देश दिए कि जिले के नगरीय निकायों में आवारा श्वानों के प्रबंधन के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना लागू की जाए।
टेंडर से लेकर ट्रेनिंग तक की रणनीति
बैठक में पशु प्रबंधन, उपचार और उन्नत नस्ल विकास की विस्तृत समीक्षा की।
त्वरित टेंडर और निर्माण : डॉग शेल्टर के लिए चिन्हित भूमि पर निर्माण कार्य तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने टेंडर प्रक्रिया को समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन : उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी नगरीय निकाय श्वानों के प्रबंधन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करें।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र : जिन इलाकों में श्वानों के काटने की घटनाएं अधिक हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम : श्वानों को पकडऩे और उनके टीकाकरण की प्रक्रिया मानवीय और सुरक्षित हो, इसके लिए पशुपालन विभाग के डॉक्टरों द्वारा निकाय कर्मचारियों और नोडल अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तैनात होंगे नोडल अधिकारी
परियोजना अधिकारी डूडा को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी निकायों से डॉग शेल्टर की भूमि, बजट प्रस्ताव और कार्य की प्रगति रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करें। प्रत्येक निकाय में इस कार्यक्रम की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो सीधे तौर पर जवाबदेह होगा।
सुरक्षा और विश्वास का नया सवेरा
इस व्यापक कार्ययोजना की सफलता से नर्मदापुरम जिला न केवल सुरक्षित बनेगा, बल्कि पशु कल्याण के मामले में एक मिसाल पेश करेगा।
योजना की सफलता से बदलाव
- भयमुक्त गलियां : व्यवस्थित प्रबंधन से सड़कों पर आवारा श्वानों के झुंड कम होंगे, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सुरक्षित महसूस करेंगे।
- रेबीज मुक्त शहर : शत-प्रतिशत टीकाकरण से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा समाप्त होगा।
- मानवीय दृष्टिकोण : शेल्टर होम बनने से श्वानों को भी सुरक्षित आश्रय और भोजन मिलेगा, जिससे समाज में पशु क्रूरता की घटनाओं में कमी आएगी।
उम्मीद रखें, समाधान करीब है
कलेक्टर की इस पहल ने जनता को एक बड़ी उम्मीद दी है। अब शहरवासियों को आवारा श्वानों की समस्या से निपटने के लिए असुरक्षित तरीकों की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासन की यह वैज्ञानिक और चरणबद्ध पद्धति आम जनता की सुरक्षा और पशुओं के प्रति करुणा, दोनों का सम्मान करती है।
इनका कहना है…
संस्थागत परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर जन-सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम एक ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जहाँ मनुष्य और पशु दोनों सुरक्षित रह सकें।
सोनिया मीना, कलेक्टर










