इटारसी/नर्मदापुरम। नवंबर माह के अंत में दिन में गर्माहट और रात में ठंड के उतार-चढ़ाव के बीच, मौसम विभाग ने आगामी दिनों में संभाग में शीतलता बढऩे का अनुमान लगाया है। पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होते ही, उत्तर से आने वाली ठंडी और शुष्क हवाओं के तेज होने से दिसंबर की शुरुआत कड़ाके की सुबह के साथ होगी। न्यूनतम पारा 13 डिग्री सेल्सियस के करीब रहेगा।
नर्मदापुरम और इटारसी क्षेत्र में अगले 7 दिनों तक दिन का अधिकतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास सामान्य बना रहेगा, जिससे दिन में हल्की धूप और सुहावना मौसम रहेगा। हालांकि, रात और सुबह के समय पारे में बड़ी गिरावट दर्ज होगी। 1 दिसंबर से न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर स्थिर होने की संभावना है। यह सामान्य से 2-3 डिग्री कम होगा, जिससे रात और सुबह के समय ठिठुरन बढ़ जाएगी।
शीतलता (ठंड की तीव्रता): सुबह-शाम ठंडी हवा चलने से चिल फैक्टर बढ़ जाएगा, जिसके कारण वास्तविक तापमान से अधिक ठंड महसूस होगी। लोगों को अब गर्म कपड़े निकालने की सलाह दी गई है।
हवाओं का रुख और नमी : आगामी दिनों में हवाओं का मुख्य रुख उत्तरी या उत्तर-पूर्वी बना रहेगा। उत्तर की तरफ से आने वाली ये शुष्क और ठंडी हवाएं ही रात के तापमान को नीचे लाने का मुख्य कारण होंगी।
हवा की गति : हवा की गति धीमी से मध्यम (लगभग 6-8 किलोमीटर प्रति घंटा) रहेगी। सुबह के समय इन ठंडी हवाओं का प्रभाव अधिक महसूस होगा।
सुबह का कोहरा : नमी का स्तर मध्यम रहने के बावजूद, नर्मदा नदी के किनारे और ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह हल्का कोहरा या धुंध छाए रहने की संभावना है।
बारिश की संभावना : फिलहाल नहीं है पर सतर्क रहें। रविवार को आंशिक बादल छाने की संभावना है। नवंबर के आखिरी दिन 30 नवंबर को संभाग के कुछ हिस्सों, विशेषकर इटारसी और नर्मदापुरम में, आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान हल्की बूंदा-बांदी की संभावना 10 प्रतिशत तक बनी हुई है, लेकिन तेज बारिश की कोई उम्मीद नहीं है।
अगले 5 दिन शुष्क : 1 दिसंबर के बाद पूरे सप्ताह मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ रहेगा। आसमान साफ होने से धूप दिन में खिली रहेगी, पर रात में गर्मी का पलायन तेजी से होगा। सुबह और देर रात बाहर निकलने से बचें। बच्चे और बुजुर्ग गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें। किसान सुबह-शाम की ठंड और कोहरे को देखते हुए, आवश्यकता अनुसार फसलों को पाले से बचाने के लिए उचित उपाय करें, विशेषकर संवेदनशील फसलों के लिए।







