इटारसी। केसला के दूरस्थ आदिवासी अंचल में लॉक डाउन का बुरा असर पड़ रहा है। खासकर उन मेहनतकश लोगों पर जो केवल अपनी मेहनत के बल पर अपना जीवन चला रहे थे। लॉक डाउन के कारण वे मजदूरी पर नहीं जा पा रहे हैं और हालात यह है कि उनको खाने को भी मोहताज होना पड़ रहा है। दो बच्चों को साथ लेकर परिवार की महिला गांव में जाकर खाना मांगकर गुजारा करने को मजबूर है।
ऐसा ही एक परिवार की जानकारी मिली है तो मुफलिसी के दौर में विगत डेढ़ दशक से जैसे-तैसे जीवन की गाड़ी खींच रहा था कि डेढ़ माह के लॉक डाउन ने जैसे उसकी कमर ही तोड़कर रख दी। दिहाड़ी मजदूर विष्णु पिता सुकर सिंह कासदे जॉलीखेड़ा का निवासी है, उसके पास फिलहाल खाने के लिए कुछ भी नहीं है। वह और उसकी पत्नी मजदूरी करके अपना परिवार चलाते थे। उसकी पत्नी का कहना है कि उनके पास आधार कार्ड तो है, लेकिन राशन कार्ड बनवाने के लिए चक्कर काटकर परेशान हैं, उनका राशन कार्ड भी नहीं बन पा रहा है। शासन की कई योजनाएं चल रही हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस मजदूर परिवार का राशन कार्ड तक नहीं बन सका है। उस परिवार के पास मजदूरी कार्ड भी नहीं है और ना ही मनरेगा के लिए कार्ड है। उसका कहना है कि वह कार्ड बनवाने के लिए चक्कर काटेगा तो उसका पेट कैसे पलेगा। पंचायत के प्रतिनिधि उसकी सुध नहीं ले रहे हैं। जिनके यहां यह मजदूरी करता है, ऐसे लोगों ने भी उसकी कोई सुध नहीं ली है। शासन की ओर से लॉक डाउन में ऐसे गरीब परिवारों की भूख मिटाना प्राथमिकता में शािमल है लेकिन इस परिवार के पास आज तक कोई नहीं पहुंचा है।
ग्रामीणों ने दिया तहसीलदार को पत्र
राशन नहीं मिलने की शिकायत का एक पत्र ग्राम लोधड़ीखुर्द और टेमलाखुर्द-नयापुरा के ग्रामीणों ने भी तहसीलदार को दिया है। ग्रामीणों का कहा है कि सरपंच और पंचायत सचिव कहते हंै कि लिस्ट में नाम नहीं होने से राशन नहीं दिया जा सकता है। इन गांवों के लगभग दो दर्जन से अधिक किसानों ने तहसीलदार के नाम पत्र में कहा है कि उनको राहत योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। सरपंच गणेश उईके, सचिव कामता प्रसाद और सहायक सचिव रुचि मेहतो का कहना है कि लिस्ट में नाम नहीं है। हमें सुविधा से वंचित किया जा रहा है।