वृद्धाश्रम से अतिक्रमण हटाने का मामला
इटारसी। पुरानी इटारसी के सनखेड़ा नाका स्थित रामबसेरा महिला वृद्धाश्रम पर एसडीएम हरेन्द्र नारायण की शुक्रवार को की गई कार्रवाई के बाद शनिवार को विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा ने वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां रह रहे बुजुर्गों से मुलाकात की और उनके हाल जाने। विधायक डॉ. शर्मा ने एसडीएम की कार्रवाई को एकतरफा बताया है। उनका कहना है कि वे अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि रामशंकर मेहतो के पास कोर्ट का स्टे है, ऐसे में इसे अतिक्रमण कैसे कहा जा सकता है।
शनिवार को डॉ. शर्मा महिला वृद्धाश्रम पहुंचे थे। उन्होंने यहां रह रहीं वृद्ध महिलाओं से चर्चा की। एसडीएम ने कहा है कि यहां रह रही महिलाओं को अन्यत्र भेजा जाएगा और यहां बने निर्माण को तोड़ा जाएगा। इस पर शनिवार को पहुंचे विधायक ने महिलाओं से पूछा कि वह जाना चाहती है कि नहीं? महिलाओं ने यहां से जाने के लिए मना कर दिया। डॉ. शर्मा का कहना है कि महिलाओं को यहां से शिफ्ट कराया जाना चाहिए, इस पर हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन एसडीएम जिस जगह को अतिक्रमण बता रहे हैं उस पर स्टे है। ऐसे में यह कैसे अतिक्रमण हुआ।

विधायक शर्मा ने लगाये यह आरोप
मीडिया से चर्चा में विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा ने कहा कि एसडीएम को यह समझ नहीं कि रमेश बामने की दुकान मेन रोड पर पीडब्ल्यूडी की सड़क पर है, जो अतिक्रमण में है और एक बार दुकान तोड़ी भी जा चुकी है। इसमें शराब दुकान चलाई जा रही है। मतलब सरकारी जमीन पर शराब की दुकान तो चलाओ लेकिन सरकारी जमीन पर वृद्धाश्रम नहीं चला सकते। यह है यहां के एसडीएम और यह है यहां का प्रशासन। यह भी कहा कि बामने ने बूढ़ी माता मंदिर रोड पर भी एक कब्जा किया है। जिसे कलेक्टर और एसडीएम से अवैध घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा जितेंद्र राजवंशी ने चांडूमल और साहू की जमीन पर कब्जा कर रखा है। एसडीएम इनका कब्जा नहीं हटा रहे हैं।
स्टे है तो अतिक्रमण कैसा
डॉ. शर्मा ने कहा कि रामशंकर मेहतो के पिता के नाम पट्टा था जो निरस्त कर दिया गया था। बाद में रामशंकर मेहतो ने पट्टा उनके नाम स्थानांतरण करने के लिए एसडीएम के समक्ष अपील की थी। इस मामले में 2013 में स्टे मिला है। जब स्टे आर्डर है तो अतिक्रमण कैसे हुआ।
एसडीएम हरेंद्र नारायण ने भी दिये जवाब
एसडीएम हरेन्द्र नारायण का कहना है कि पुरानी इटारसी सरकारी भूखंड पर रामशंकर मेहतो का अवैध कब्जा था। 23 जुलाई 2013 में कब्जे को अवैध घोषित करके तुरंत अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। साथ ही डेढ़ लाख रुपए जुर्माना किया था। यह भी आदेश था कि अतिक्रमण नहीं हटाने पर 2 हजार रुपए रोज की पेनॉल्टी लगाई जाएगी। इसके बाद एसडीएम के समक्ष पट्टा नवीनीकरण की अपील की थी जो 4 जुलाई 2017 को खारिज हो चुकी है, तो स्टे कहां है? अतिक्रमण हटाने के आदेश हो चुके हैं। सिविल जेल का वारंट भी जारी किया है। यदि अतिक्रमण नहीं हटा तो जेल भेजेंगे और जुर्माना मय पेनाल्टी के वसूलेंगे।
यह भी कहा कि वहां वृद्ध महिलाओं को ठंड में रखा जा रहा था। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया, सरकारी अस्पताल के दो चिकित्सकों से महिलाओं का चैकअप भी कराया था। चिकित्सकों का कहना था कि वृद्धों को ऐसी ठंड में यहां नहीं रखना चाहिए। अब सामाजिक न्याय विभाग इन वृद्ध महिलाओं को शिफ्ट कराएगा। एसडीएम ने कहा कि विधायक जिनका भी नाम ले रहे हैं, यदि न्यायालय ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं तो बताएं। ऐसा कोई आदेश हैं तो कार्रवाई की जाएगी। जो शिकायत की थी उसकी जांच कराई जा चुकी है, लेकिन ऐसा कुछ पाया ही नहीं गया। फिर से उन्होंने जांच की मांग की थी तो फिर से जांच करा रहे हैं।








