बिना टेंडर-टीएस के हुए 30 लाख के विकास कार्य का मामला
इटारसी। करीब तीन वर्ष पूर्व बिना टेंडर और तकनीकि स्वीकृति के हुए निर्माण कार्य के मामले में प्रमुख अभियंता ने ठेका फर्म को तो नोटिस जारी कर दिया, लेकिन उस दौरान के अफसरों पर क्यों मेहरबानी दिखायी। बिना अफसरों की स्वीकृति के, लाखों रुपए के (हालांकि शिकायतकर्ता 3 करोड़ की गड़बड़ी बता रहे) कार्य कैसे हो सकते हैं। कोई फर्म शहर में बिना अधिकारियों की जानकारी के कैसे कार्य कर सकती है? यह बात गले नहीं उतरती। ठेका फर्म, वह भी उस फर्म को, जिसके संचालक की मौत हो चुकी है, यह भी विचारणीय पहलू है। आखिरकार, मामला यहीं खत्म करने की मंशा रही होगी। इन सबके बीच इतना अवश्य है कि शहर को बिना पैसा लगाये ये निर्माण कार्य मिल गये हैं।
उल्लेखनीय है कि सन् 2017 में नगर में बिना टेंडर, बिना तकनीकी स्वीकृति के हुए निर्माण कार्यों की एक शिकायत पर जांच के बाद तत्कालीन सब इंजीनियर मुकेश जैन ने जांच करके तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। अब बताया जा रहा है कि वह जांच रिपोर्ट नगर पालिका से लापता है। पूर्व पार्षद शिवकिशोर रावत और यज्ञदत्त गौर की शिकायत पर इन अवैधानिक निर्माण कार्यों की जांच के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास के प्रमुख अभियंता एनपी मालवीय ने निर्माण कार्य करने वाली फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही इस गड़बड़ी को लेकर जवाब नहीं मिलने पर एक पक्षीय कार्रवाई करके फर्म को ब्लैकलिस्टेड करने के संकेत भी दिये हैं। जिस यशस्वी ट्रेडर्स ने यह काम किए हैं, उसके संचालक शैलेन्द्र मालवीय की कुछ माह पूर्व मृत्यु हो चुकी है। इस मामले में जारी नोटिस में प्रमुख अभियंता ने लिखा है कि नगर पालिका सीमा क्षेत्र में बिना सक्षम अधिकारी की मंजूरी, बिना निविदा प्रक्रिया एवं बिना वर्कआर्डर के करीब 11 निर्माण कार्य हुए हैं। प्राप्त शिकायत पर संभागीय संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास नर्मदापुरम ने जांच की, जिसमें यशस्वी ट्रेडर्स द्वारा यह काम होना बताया गया है। जिन कामों की जांच की गई है, वे करीब 30 लाख रुपये के बताए गए हैं, जबकि पूर्व पार्षद शिवकिशोर रावत का कहना है कि ऐसे करीब 3 करोड़ रुपये के काम हुए हैं जिसमें काम पहले हुआ और बाद में टेंडर जारी हुए।
इनका कहना है…!
अभी तो भुगतान रुकवाया है, हम आगे दोषियों को सजा दिलवाने तक लड़ाई जारी रखेंगे। हमारी मांग है, कि उस दौरान के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और जो भी इसमें लिप्त हैं, सबको जांच के दायरे में लाकर कार्रवाई होनी चाहिए।
शिवकिशोर रावत, पूर्व पार्षद एवं शिकायतकर्ता
मुझे तो दो एनआईटी के आधार पर जांच करने के निर्देश मिले थे। मैंने जो भी जांच की थी, उसमें मौके पर जाकर स्थिति देखने के बाद प्रतिवेदन तैयार किया और रिपोर्ट तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला को सौंप दी थी।
मुकेश जैन, तत्कालीन सब इंजीनियर
ये सारे मामले हमारे कार्यकाल के पूर्व के थे। इन मामलों की सारी जांच हो चुकी है, केसबुक का अवलोकन हो चुका। न तो कोई कार्य आदेश निकले और ना ही टेंडर हुए। कोई भुगतान भी नहीं किया है। रही बात उपयंत्री के प्रतिवेदन की तो उन्होंने कोई विधिवत प्रतिवेदन हमें नहीं दिया था।
अक्षत बुंदेला, तत्कालीन सीएमओ









