निरंकुशता समाप्त करने श्रीकृष्ण ने रुकमणी से विवाह किया

निरंकुशता समाप्त करने श्रीकृष्ण ने रुकमणी से विवाह किया

कल्चुरी भवन में श्रीमद् भागवत कथा का छटवे दिन का आयोजन
इटारसी। कल्चुरी भवन में श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस आचार्य पं. मधुसूदन शास्त्री ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को रुकमणी से विवाह करना इसलिए जरूरी था कि वह समाज की निरकुंशता को समाप्त करना चाहते थे। कथा को विस्तार देते हुए पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि विदर्भ देश के कुन्डिन नरेश महाराज भीष्मक अपने बढ़े बेटे रुकमी के स्नेहवस अपनी कन्या रुकमणी का विवाह तेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से करना चाहते थे।
महाराजा भीष्मक ने रुकमणी के विवाह की सारी व्यवस्था कर ली थी और राजा दमघोष को बारात लाने का निमंत्रण भी भेज दिया था। महाराजा भीष्मक ने शिशुपाल के साथ रुकमणी के विवाह की तैयारियां ऐसी की थी मानों पृथ्वी पर स्वर्ग उतर आया हूं। भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी एक दूसरे को मन ही मन बहुत चाहते थे। रुकमणी को जब यह लगा कि उसे सहारा देने वाला कोई नहीं है तब उसने राज्य के एक ब्राह्मण से भगवान श्रीकृष्ण को पाती भिजवाई और पाती में अपने अपहरण की पूरी बात लिखी कि किस तरह भगवान उसके राज्य में आकर उसका अपहरण कर लें और उससे विवाह कर लें। भगवान कृष्ण के पास रुकमणी का संदेश देने वाला ब्राह्मण जब पहुंचा तब उन्होंने उससे यही कहा कि रुकमणी यदि मुझे चाहती है तो मैं भी रुकमणी को उतना ही चाहता हूं। भगवान श्रीकृष्ण अपने साथी दारूक को निर्देश दिया कि वह रथ लेकर आए।
पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि आज के समय के अपहरण और भगवान के समय के अपहरण में जमीन आसमान का अंतर है। आज के समय के अपहरण कामुकता और हत्या के लिए किए जाते हैं। जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने रुकमणी का विवाह उनके पिता के द्वारा अपने पुत्र रुकमी के कारण शिशुपाल से करने का जो निर्णय लिया था वह रुकमणी को स्वीकार नहीं था। स्वयं रुकमणी ने भगवान को अपने अपहरण के लिए एक ब्राह्मण के हाथों पाती भेजी थी। भगवान श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर विदर्भ देश पहुंचे और रुकमणी की योजना के अनुसार जब वह विवाह के एक दिन पूर्व गिरिजापूजन के लिए जा रही थी तब गिरिजापूजन से लौटते समय भगवान श्रीकृष्ण ने रुकमणी का हरण किया। रुकमणी के भाई रुकमी ने जब अपहरण में व्यवधान डालने की कोशिश की तब श्रीकृष्ण ने उसके बाल काटकर उसकी मूछें मुड़वा दीं। तब रुकमणी के अनुरोध पर ही भगवान कृष्ण ने रुकमी को छोड़ा। आज कल्चुरी भवन में श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह का आयोजन किया। पूरा विवाह जैसा माहौल था और रुकमणी का कन्यादान चौकसे परिवार ने किया। भगवान कृष्ण की बारात में श्रद्धालु झूमकर नाचे। शनिवार का कथा का विश्राम हो जाएगा।

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