बनखेड़ी। श्रावणी पूर्णिमा पर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र पर आचार्य पंण् शिवराम शास्त्री के सानिध्य में श्रावणी उपाकर्म संपन्न हुआ। आचार्य पंडित शिवराम शास्त्री ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के तीन तीन पक्ष होते है।। पहला प्रायश्चित संकल्प, दूसरा संस्कार और तीसरा स्वाध्याय। यह वैदिक परंपरा में वैदिक शिक्षा साढ़े पांच या साढ़े छह मास तक चलती है। वर्तमान में श्रावणी पूर्णिमा पर ही उपाकर्म और उत्सर्ग दोनों विधान कर दिए जाते हैं। प्रतीक रूप में किया जाने वाला यह विधान हमें स्वाध्याय और सुसंस्कारों के विकास के लिए प्रेरित करता है।
श्रावणी उपाकर्म उत्सव में वैदिक विधि से हेमाद्री प्रोक्त, प्रायश्चित संकल्प, सूर्याराधन, दसविधि स्नान, तर्पण, सूर्योपस्थान, यज्ञोपवीत धारण, प्राणायाम, अग्निहोत्र व ऋषि पूजन किया जाता है। शास्त्रों में श्रावणी को द्विज जाति का अधिकार व कर्तव्य बताया और कहा कि वेदपाठी ब्राह्मणों को तो इस कर्म को किसी भी स्थिति में नहीं त्यागना चाहिए। इस दौरान सभी विप्रजन उपस्थित रहें।









