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चुनावी चौपाल : शोर-शराबे से परे, डोर-टू-डोर संपर्क पर जोर

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इटारसी। नगर सरकार के लिए राजनैतिक दल कमर कस चुके हैं। प्रत्याशी शोर-शराबे से परे, डोर-टू-डोर संपर्क करने में ज्यादा जोर दे रहे हैं। हालांकि कुछ वार्डों में रिक्शों पर प्रचार भी प्रारंभ हो गया है। लेकिन, चुनावी शोर फिलहाल लगभग शांत ही है। भाजपा अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में बाजी मारती दिख रही है। पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में स्वयं सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जनता को संबोधित करने शनिवार को आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के आगमन की तैयारी में पार्टी के आला नेता विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हैं, जबकि प्रत्याशी अपने वार्ड में ही मतदाताओं के बीच रहने पर ध्यान दे रहे हैं। संभव है, कल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा में भाजपा के सभी 34 वार्ड के प्रत्याशी शामिल हों।
जहां तक बात कांग्रेस की है, पार्टी के अभी किसी बड़े नेता के आगमन की सूचना नहीं है। स्वयं कांग्रेस के नगर अध्यक्ष वार्ड 15 से चुनाव मैदान में हैं, वे अपने वार्ड में ज्यादातर वक्त बिताएंगे तो संभव है कि अन्य वार्डों के प्रत्याशियों के लिए अधिक समय न दे पाएं। बावजूद इसके वार्ड स्तर पर पार्टी के बागियों को मनाकर अपने पक्ष में समर्थन लेने पर जोर दिया जा रहा है और उनकी इस योजना में वे कामयाब होते भी दिख रहे हैं। आज ही वार्ड नंबर 22 की निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति आकाश यादव ने अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी आशा यादव को समर्थन दे दिया और कांग्रेस ने बाकायदा फोटोग्राफ और समाचार जारी करके इसकी सूचना दी है। आज प्रीति यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी आशा यादव को समर्थन देने की घोषणा की है। कांग्रेसियों का कहना है कि प्रीति यादव स्वयं कांग्रेस की अच्छी कार्यकर्ता हैं। उनके स्थान पर आशा यादव को कांग्रेस ने टिकट दिया। प्रीति यादव ने अपना नामांकन फार्म नहीं उठाया और वे निर्दलीय मैदान में थीं, हालांकि कांग्रेस ने उनको मनाकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन देने के लिए राजी कर ही लिया है।
आम आदमी पार्टी भी इस चुनाव में पहली बार नगर सरकार में अपने प्रतिनिधि भेजने के लिए मैदान में उतरी है। लगभग आधे शहर में उसके प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस को चुनौती देने के लिए उतरे हैं। वे अपने मकसद में कितने कामयाब हो पाते हैं, यह तो परिणाम आने के बाद पता चलेगा, लेकिन पार्टी के प्रत्याशी बिना किसी शोर के कामयाब होने के लिए अपने वार्डों में मतदाताओं के बीच जा रहे हैं। संभव है, कि इस परिषद में आम आदमी पार्टी का भी प्रतिनिधित्व हो।

निर्दलीय भी कम चुनौती नहीं

टिकट की दौड़ में कामयाब नहीं होने पर भाजपा और कांग्रेस के कई लोगों को टिकट से वंचित होना पड़ा है। ऐसे में अनेक लोगों ने अपना नाम वापस नहीं लिया और वे चुनाव मैदान में हैं। हालांकि दोनों पार्टी के नेताओं ने अपने बागियों को मनाकर नाम वापसी में जोर लगाया था, बावजूद इसके कुछ बागी इनके हाथ नहीं आये और वे अब चुनाव मैदान में हैं। बागियों का मैदान में होना किसी चुनौती से कम नहीं है। वे काफी हद तक चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, क्योंकि स्थानीय चुनावों में हार-जीत का अंतर इतना छोटा होता है कि किसी निर्दलीय ने सौ-पचास वोट भी हासिल कर लिए तो यह पार्टी प्रत्याशी की हार तय कर सकता है।

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