इटारसी। देश के भविष्य बच्चों में राष्ट्ररक्षा के लिये वीरता का भाव बचपन से ही होना चाहिये तभी बड़े होकर वे सच्चे देशभक्त बन सकते हैं। यह प्रेरणादायी संदेश प्रभु श्रीराम ने अपनी बाल लीलाओं में संसार को दिया है। उक्त उद्गार आचार्य पं. अतुल द्विवेदी ने ग्राम पथरोटा में आयोजित श्रीराम कथा समारोह में व्यक्त किये।
श्रीराम मंदिर प्रंागड पथरोटा में आयोजित श्रीराम कथा समारोह के चतुर्थ दिवस में उपस्थित श्रोताओं को भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं के ज्ञानपूर्ण दर्शन कराते हुये आचार्य अतुल द्विवेदी ने कहा की श्रीराम ने अपने अनुज लक्ष्मण को साथ लेकर महर्षि विश्वामित्र के निर्देशन में अपने बाल्यकाल में ही राक्षसी ताड़का सहित असुरों का वध कर ऋषि मुनियों की तपोभूूमि को आसुरी शक्तियों से मुक्त कराकर वहां धर्म की स्थापना की। श्रीराम ने बाल्यावस्था में ही शक्तिशाली शिवधनुष का संधान कर अहंकारी राजाओं को नतमस्तक कर यह संदेश दिया कि जिनके मन में राष्ट्ररक्षा की भावना होती है, उनकी शौर्यता और वीरता बाल्यकाल में ही नजर आ जाती है। श्री द्विवेदी ने कहा की राम-लखन जैसे शूरवीर बालक ही संसार में बालवीर कहलाते हैं। कथा के प्रारंभ में श्रीराम मंदिर समिति पथरोटा ने आचार्य का स्वागत किया।
बच्चों के लिये प्रेरणादायी है श्रीराम की बाल लीलायें: द्विवेदी


Rohit Nage
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