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Rang Panchami 2023 : होली के पांचवे दिन क्यों मनाते हैं रंगपंचमी ? जानें सम्‍पूर्ण जानकारी

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रंग पंचमी 2023 (Rang Panchami 2023)

Rang Panchami 2023: हिन्‍दू धर्म में होली का त्‍यौहार का अत्‍यधिक महत्‍व होता है। होली त्‍यौहार के पांचवें दिन चैत्र कृष्ण पंचमी को बड़े ही धूम-धाम से रंगपंचमी का त्‍यौहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, रंगपंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी।

इस दिन भगवान राधा कृष्‍ण की पूजन के समय उन्हें गुलाल अर्पित कर विधि-विधान से पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन पूजा-पाठ करने से कुंडली के दोष से मुक्ति मिलती हैं। इस वर्ष रंग पंचमी का त्‍यौहार 12 मार्च दिन रविवार को मनाया जाएगा।

रंग पंचमी शुभ मुहूर्त (When is Rang Panchami 2023)

इस वर्ष रंग पंचमी का त्‍यौहार 12 मार्च 2023, दिन रविवार को मनाया जाएगा।

  • चैत्र मास पंचमी का प्रारंभ – 11 मार्च 2023 दिन शनिवार को रात्रि 10:05 बजे से।
  • चैत्र मास पंचमी का समापन – 12 मार्च 2023 दिन रविवार को रात्रि 10:01 बजे।
  • इस दिन अभिजित दोपहर 12:07 से लेकर 12:55 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:30 से लेकर 03:17 बजे तक रहेगा।

रंग पंचमी का महत्व (Significance of Rang panchami 2023)

हिन्‍दू धर्म में रंग पंचमी का अत्‍यधिक महत्‍व होता हैं मान्यता है यह दिन की रंगों के साथ देवी-देवताओं के पूजा-आराधना के लिए माना जाता है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार ऐसा करने से सात्विक गुणों में अभिवृद्धि होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही रंग पंचमी के दिन पूजा-पाठ करने से कुंडली के दोष से मुक्ति मिलती हैं। और जीवन में सुख-समृद्ध हमेशा बनी रहती है।

कैसे मनाते हैं रंग पंचमी (How to celebrate Rang panchami 2023)

रंगपंचमी का त्‍यौहार अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा के साथ होली खेली थी। इसलिए इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में यह त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाते हैं। जुलूस निकाला जाता है, गुलाल उड़ाया जाता है।

रंग पंचमी की पूजा विधि (Rang Panchami 2023 worship method)

  • रंग पंचमी के दिन भगवान राधा-कृष्ण की पूजा करने का विधान हैं।
  • रंग पंचमी के दिन प्रात: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर कर स्नान आदि से मुक्‍त होकर सूर्य को जल चढ़ाएं।  
  • इसके बाद भगवान राधा-कृष्‍ण की प्रतिमा को एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उत्तर दिशा की और सथापित करें।
  • इसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं।
  • इसके बाद कलश की स्‍थापना करें और उसमें नारियल रखें।
  • इसके बाद रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, अबीर, गुलाल, फल, धूप, दीप आदि से भगवान का पूजन करें।
  • इसके बाद भोग में विशेष रूप से खीर और पंचामृत चढ़ाएं।
  • इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और ‘ॐ श्रीं श्रीये नमः’ मंत्र का जाप करें।  

इस दिन होते हैं विवाह तय

रंग पचमी के दिन खासतौर पर महाराष्ट्र राज्‍य में यह त्‍यौहार मनाने का तरीका सबसे अलग होता है। महाराष्‍ट्र में इस दिन मछुआरों की बस्ती नाचने-गाने, खाने पीने का का खास आयोजन किया जाता है, वहां विवाह के लिए यह दिन काफी शुभ माना जाता है।

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