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तो फिर क्यों अवैध वेंडरिंग के लिए कुख्यात है स्टेशन, जबकि…

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डीआरएम साहब भोपाल से रखते हैं इटारसी स्टेशन के हर प्लेटफार्म पर नज़र
महिला रोती रही, अफसर चले गए
इटारसी। डीआरएम साहब इटारसी रेलवे स्टेशन के हर प्लेटफार्म पर भोपाल में बैठकर नज़र रखते हैं, इटारसी और भोपाल में इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम है, यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हैं। यह कहना है जबलपुर रेलवे जोन के महाप्रबंधक गिरीश पिल्लई का। वे यहां की सुरक्षा व्यवस्था पर किए सवाल का जवाब दे रहे थे। जीएम ने एक तरह से इस जवाब से यह तो बता ही दिया कि यहां की हर गतिविधि पर डीआरएम भोपाल की निगाहें हैं, चाहे वे वैध हो या अवैध। फिर क्या कारण है कि यहां रेलवे स्टेशन पर चलने वाले सैंकड़ों अवैध वेंडर डीआरएम साहब को दिखाई नहीं देते हैं?
रेलवे जोन जबलपुर के महाप्रबंधक गिरीश पिल्लई आज खंडवा से वार्षिक निरीक्षण करते हुए शाम 6:20 बजे इटारसी पहुंचे थे। यहां स्टेशन अधीक्षक के दफ्तर में मीडिया से चर्चा में श्री पिल्लई ने कहा कि इटारसी हमारी प्राथमिकता में शामिल है। हम यहां के ट्रैफिक को कम करने जा रहे हैं, जिन ट्रेन का यहां कोई काम नहीं, वे यहां नहीं आएंगी। खासकर गुड्स ट्रेन को फ्लाईओवर के माध्यम से सीधे निकाला जाएगा, स्टेशन पर केवल यात्री ट्रेनें ही आएंगी।
एस्केलेटर भी जल्द लगेगा
जीएम श्री पिल्लई ने कहा कि इटारसी रेलवे स्टेशन हमारे भोपाल मंडल का सबसे अधिक प्राथमिकता वाला स्टेशन है। यहां एस्केलेटर हमारी प्राथमिकता में शामिल है। दो लिफ्ट लगायी जा चुकी हैं, शेष भी जल्द लगायी जाएंगी। एक्सकेलेटर के लिए भी हमारी कार्यवाही चल रही है, यह काम भी जल्द से जल्द कराया जाएगा। इटारसी को पीपीपी मोड में डेवलप करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्लान नहीं है, भारतीय रेल में केवल हबीबगंज से इसकी शुरुआत की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था कमजोर नहीं
रेलवे जोन के जीएम ने यहां की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल पर कहा कि यहां की सुरक्षा व्यवस्था कतई कमजोर नहीं है, इटारसी और भोपाल रेलवे स्टेशन पर इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम लगा है जिसके माध्यम से स्वयं डीआरएम भोपाल में बैठकर यहां के सभी प्लेटफार्म पर नज़र रखते हैं। अवैध वेंडरों के लिए कुख्यात इस स्टेशन के विषय में जीएम का कथन मायने रखता है। डीआरएम स्वयं सभी प्लेटफार्म पर नज़र रखते हैं तो फिर क्यों इतनी बड़ी संख्या में यहां अवैध वेंडर चलते हैं।
it20317 (4)पिपरिया तक विद्युतीकरण इसी वर्ष
रेलवे जोन के महाप्रबंधक गिरीश पिल्लई ने कहा कि इटारसी से पिपरिया तक रेल विद्युतीकरण इसी वर्ष पूर्ण हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मार्च माह के अंत में रेलवे सेफ्टी अधिकारी यहां का दौरा करेंगे। उन्होंने बताया कि पहले 70 किलोमीटर तक यानी इटारसी से पिपरिया के बीच इसी वर्ष बिजली से ट्रेनें दौडऩे लगेगी। इसके बाद जबलपुर से मानिकपुर के बीच का काम पूर्ण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि खंडवा से इटारसी के बीच उन्होंने वार्षिक निरीक्षण किया है।
टेंडर काल हो गए हैं
नई गरीबी लाइन में पुराने रेलवे गेट पर अंडर ब्रिज का सवाल जब जोन महाप्रबंधक श्री पिल्लई से किया तो उन्होंने सवाल डीआरएम की ओर कर दिया। डीआरएम ने 4 मार्च को भी इसी सवाल को टाल दिया था, जब सांसद की मौजूदगी में उनसे यही सवाल किया गया था। आज भी जवाब नहीं दिया। अलबत्ता महाप्रबंधक को यह बताया कि टेंडर काल किया है, एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। बता दें कि दो वर्ष से यह मामला पेंडिंग है, जबकि राज्य सरकार पैसे भी जमा कर चुकी है।
चलते-चलते किया निरीक्षण
जीएम का इटारसी स्टेशन का निरीक्षण महज औपचारिकता थी। वे अपनी स्पेशन ट्रेन से 6:30 बजे बाहर निकले और सीधे स्टेशन अधीक्षक कार्यालय की ओर तेजी से निकले। उनके साथ अधिकारी तेजी से चलते रहे। अचानक वे प्लेटफार्म के महिला प्रतीक्षालय में पहुंच गए। महज एक मिनट में वहां से बाहर आए फिर एक खानपान रूप में जाकर व्यवस्था देखी। एक और प्रतीक्षालय में जाकर टायलेट और सफाई व्यवस्था देखी फिर सीधे स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय में प्रेस से बात की।
बिजली गुल, सीनरी गिरी
जीएम ने जैसे ही स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय में प्रवेश किया, कार्यालय की बिजली गुल हो गयी। पसीने में तर-बतर होकर ही उन्होंने करीब बीस मिनट प्रेस से चर्चा की। जब मीडिया से जीएम श्री पिल्लई चर्चा कर रहे थे, इसी दौरान स्टेशन अधीक्षक की कुर्सी के पीछे दीवार पर टंगी सीनरी गिर गयी और उसका कांच टूट गया। सौभाग्य से सीनरी जीएम पर नहीं गिरी, अन्यथा उन्हें चोट लग सकती थी। दरअसल उनके पीछे खड़े अधिकारियों के टकराने से सीनरी गिरी थी, जिसे बाद में हटा दिया।
it20317 (5)महिला रोती रही, अफसर चले गए
डोलरिया में पदस्थ रेलवे कर्मचारी तुलसीराम प्रजापति की पत्नी वंदना प्रजापति अपने लिए अनुकंपा नियुक्ति की गुहार लेकर जीएम से मिलने आयी थी। पहले तो महिला को जीएम से स्थानीय अधिकारी मिलने ही नहीं दे रहे थे। जब मीडिया ने हस्तक्षेप किया तो आखिर अधिकारियों का रुख थोड़ा नर्म हुआ। जैसे ही जीएम गिरीश पिल्लई स्टेशन अधीक्षक वायएस वघेल के कैबिन से निकले, और सीधे जाने लगे तो महिला को रोता देख वे रुक गए। हालांकि अधिकारियों ने प्रयास किया था कि जीएम महिला ने न मिल पाएं। लेकिन महिला के रोने की आवाज सुनकर जीएम श्री पिल्लई रुके और महिला से कारण पूछा। महिला ने बताया कि मैंने आवेदन दिया है। जीएम ने बस इतना सुना और कहा कि मैं दिखवाता हूं, और चल दिए। महिला ने बताया कि 16 मई 2013 से उसके पति लापता हैं। वे डोलरिया रेलवे स्टेशन पर कांटेवाले के पद पर पदस्थ थे। उनके लापता होने के बाद वे और उनकी मासूम बच्ची के सामने आर्थिक संकट आ गया है। महिला ने अपने पति के लापता होने की सूचना डोलरिया थाने में भी दी तथा रेलवे के आला अफसरों को भी व्यथा सुनाई लेकिन कोई भी मदद को तैयार नहीं है। रेलवे अधिकारियों का उससे कहना है कि सात वर्ष से पूर्व वे कुछ भी नहीं कर सकते हैं। उसके जीविकोपर्जन का कोई साधन नहीं था तो डीआरएम के कहने से उसे स्टेशन पर पेड़-पौधों में पानी देने व अन्य काम दिया है जिससे उसे 3 हजार रुपए मिल जाते हैं, लेकिन बच्ची बड़ी हो गई तथा उसकी पढ़ाई में अधिक पैसे खर्च होते हैं, यदि उसे अनुकंपा नियुक्ति मिल जाए तो वह अपना जीवन आसानी से गुजार सकेगी। जीएम ने कहा कि वे देखते हैं, क्या हो सकता है?

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