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सीजन की सबसे बड़ी आगजनी,आग का मचा भयानक तांडव

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इटारसी। डोलरिया तहसील के ग्राम ढाबा खुर्द-ढाबा कलॉ और इटारसी के करीब पौने दो सौ एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल में लगी आग से किसानों को लगभग साठ लाख रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। ढाबाकला में खेतों में लगी आग इस सीजन की सबसे बड़ी आगजनी साबित हुई। यहां आग का भयानक तांडव इतना खतरनाक था कि उसने डेढ़ सौ एकड़ खेत को लील लिया. किसानों को आग पर काबू पाने का मौका ही नहीं मिला। जिसे भी सूचना मिली वह खेतों की ओर दौड़ा और आग बुझाने में मदद की।
इस बीच नगर पालिका इटारसी, नगर पालिका होशंगाबाद, एसपीएम होशंगाबाद, सिवनी मालवा और शिवपुर से दमकलें आग बुझाने पहुंची। और करीब 5 दमकलों ने आग बुझाने में मदद की।
सूचना के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। सबके प्रयासों के बावजूद आग सैकड़ों एकड़ क्षेत्र में फैल गई और देखते ही देखते पौने दो सौ एकड़ की खड़ी फसल लील गयी। ग्राम जमानी के किसान हेमंत दुबे बताते हैं कि आग गेहंू के खेत और नरवाई में करीब एक हजार एकड़ में फैली थी और इतने ही रकबे में हजारों किसान, फायर ब्रिगेड, टैंकरों और झाडिय़ों की मदद से आग बुझाने में जुटा था। आग की भयावहता का आलम यह था कि दोपहर करीब 12 बजे आग शुरु हुई और शाम को पौने पांच बजे आग पर काबू पाया जा सका है।
टैंकरों को बनाएं फायर फायटर
नर्मदांचल में पिछले एक सप्ताह से हो रही आगजनी की घटनाओं के बीच फिर मांग उठने लगी है कि अब तो ग्राम पंचायतों को शासन ने जो टैंकर प्रदान किए थे, उन्हें पंप लगाकर फायर फायटर में तब्दील किया जाए। सिवनी मालवा के विधायक सरताज सिंह इस प्रयोग को कर चुके हैं जिससे उस क्षेत्र में होने वाली आगजनी की घटनाओं पर तीव्रता से काबू पाया जाता है, जबकि इस क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में टैंकर पंचायत सचिवों और सरपंचों की आमदनी का ज़रिए बनें हैं तो कुछ खड़े-खड़े ही कंडम हो रहे हैं। पंचायतों के टैंकर ठेकेदारों और अन्य जरूरत पर लोगों को किराए पर देकर कमाई का साधन बन गए हैं। सैंकड़ों की सं या में पंचायतों को मिले टैंकरों पर मोटरपंप लगाकर इन्हें फायर फायटर बनाकर आगजनी की घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है।
इस वर्ष होने वाली आगजनी की घटनाओं से यह मांग अब जोर पकडऩे लगी है। इसी तरह से कृषि उपज मंडी समितियों को भी अपनी नीति में बदलाव करके फायर ब्रिगेड खरीदने की योजना बनानी चाहिए, क्योंकि किसान की फसल जब बिकती है तो मंडी शुल्क भी मिलता है। लाखों रुपए की फसल ही जल जाएगी तो मंडी शुल्क में भी कमी आएगी। शासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

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