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हजारों रुपए खर्च करके भी नहीं हो रहा उद्देश्य पूरा, कृषि रथ वापस लौटाया

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इटारसी। ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के तहत ब्लाक मुख्यालय से निकाले जा रही कृषि रथ का आज ग्राम चांदौन में ग्रामीणों ने विरोध करके रथ को वापस कर दिया। दरअसल रथ जब गांव पहुंचा तो उसमें केवल एक अधिकारी थे जिनके पास ग्रामीणों के सवालों के जवाब नहीं थे। इस स्थिति में गांव का जनपद में प्रतिनिधि करने वाले जनपद सदस्य अजय महालहा भी नाराज़ हो गए।
ग्रामीणों ने पंचनामा तैयार करके कहा कि रथ के साथ विभागों के जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं हैं तो कैसे ग्रामीणों को उनके सवालों का जवाब मिलेगा? ऐसे रथ निकालकर महज औपचारिकता पूर्ण करने से बेहतर है कि रथ ही न निकालें जिससे शासकीय राशि का ऐसा दुरुपयोग नहीं होगा। यदि प्रशासन को वास्तव में ग्रामोदय से भारत उदय के उद्देश्य को पूरा करना है तो विधिवत कृषि रथ निकालना होगा।
आज से ब्लाक मुख्यालय केसला से कृषि रथ को एसडीएम ने हरी झंडी देकर रवाना किया है। ब्लाक में दो रथ निकाले जा रहे हैं, लेकिन पहले ही दिन ग्राम चांदौन के ग्रामीणों ने विरोध करके कृषि रथ निकाले जाने की योजना की कलई खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि रथ में केवल एक अधिकारी थे। न तो पशुपालन विभाग, ना मत्स्य पालन से कोई अधिकारी था। इसके अलावा इसमें कोई विषय विशेषज्ञ भी नहीं थे जो ग्रामीणों के सवालों का जवाब देकर उन्हें संतुष्ट कर सकें। ऐसे रथ का गांव में भेजना औचित्यहीन है।
ग्रामीणों ने रथ को गांव से वापस कर दिया और पंचनामा तैयार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने किसी को गांव में सूचित भी नहीं किया है कि अमुक तारीख को गांव में रथ आएगा क्योंकि पंचायत सचिव और सरपंचों की हड़ताल चल रही है। रोजगार सहायक को कोई सूचना नहीं दी गई थी। कुल जमा ग्रामीणों को रथ के आने की जानकारी ही नहीं थी। पहले पंचायत में सूचना के बाद गांव में मुनादी होती थी और दीवार लेखन के माध्यम से ग्रामीणों को सूचना दी जाती थी। इस बार ऐसा कुछ भी नहीं किया। केवल रस्म अदायगी की गई है।
इनका कहना है…!
एक रथ में करीब 25 हजार रुपए का खर्च आ रहा है। इस तरह की औपचारिकता निभाने से केवल सरकारी पैसे का दुरुपयोग ही हो रहा है। ग्रामीणों के सवालों का जवाब ही नहीं मिलेगा तो ऐसे कृषि रथ का क्या औचित्य?
अजय महालहा, अध्यक्ष
कृषि समिति जनपद पंचायत केसला

मुझे अभी इस विषय में जानकारी नहीं है। हम ग्राम रोजगार सहायक से पता करते हैं कि कौन-कौन आया था। यदि शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना में निचले स्तर पर अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे तो हर कोई नाराज़ होगा। अधिकारियों को सहयोग करना चाहिए ताकि शासन की मंशा को पूर्ण किया जा सके।
सीपी सोनी, जनपद सीईओ

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