इटारसी। भारतीय धर्म संस्कृति अहिंसा, संयम और आध्यात्म में विश्वास रखते हैं। इसलिए हमारे देश को विश्व गुरु की उपाधि प्राप्त है। उक्त ज्ञानपूर्ण उद्गार बाल ब्रम्हचारी जैन मुनि बसंत जी महाराज ने श्री द्वारिकाधीश मंदिर प्रांगण में रविवार की शाम आयोजित आध्यात्मिक धर्म सभा में व्यक्त किए।
श्री राम जानकी द्वारिकाधीश मंदिर समिति, श्री राम जन्मोत्सव समिति एवं श्री तारण तरण दिगम्बर जैन संगठन सभा द्वारा आयोजित इस आध्यात्मिक धर्म सभा में उपस्थित नगर के गणमान्य श्रोताओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कराते हुए बाल ब्रम्हचारी बसंत जी महाराज ने कहा कि आध्यात्म हमारे देश की नींव है। इस रहस्य को समझना आज के समय में बहुत ही आवश्यक हो गया है। देश के कुछ भागों में फैली हिंसा तभी रुकेगी जब हम वहां के हिंसात्मक लोगों को आध्यात्म के महत्व से प्रतिपादित कर देंगे। श्री गुरू महाराज ने कहा कि वर्तमान परिवेश में संतवाणी का चिंतन हमारे जीवन सुख शांति प्रदान करता है।
धर्म के प्रति विश्वास, परमात्मा के प्रति आस्था, हमारे जीवन में निर्भयता और आत्म विश्वास को पैदा करती है। उच्च लक्ष्य बनाने पर ही व्यक्ति अपने वर्तमान पद को संयमित दिशा दे सकता है। चूंकि व्यक्ति समाज की इकाई होता है, संपूर्ण देश के वातावरण को पवित्र बनाना प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में परिवर्तन लाने का संकल्प करना होगा। व्यक्ति से परिवार और परिवारों से नगर, नगरों से प्रांत तथा प्रान्तों से देश बनते हैं। श्री जैन मुनि ने कहा की हर व्यक्ति सदगुणों के मार्ग पर चलने का संकल्प करें तो हम संपूर्ण देश का एक नये रूप मे निर्माण कर सकते हैं। उपरोक्त धर्म सभा के शुभारंभ अवसर पर श्री राम-जानकी द्वारिकाधीश मंदिर समिति एवं श्री राम जन्मोत्सव समिति के द्वारा आध्यात्म रत्न बाल ब्रम्हचारी श्री बसंत जी महाराज के साथ ही उनके सहयोगी ब्रहमचारी श्री आत्मानंद जी, मुक्तानंद जी, सदानंद जी एवं साध्वी उषा देवी का पुष्हारों से स्वागत किया।
आध्यात्म हमारे देश की नींव है : बसंत जी महाराज
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