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नहीं पता है पूर्वजों की मृत्यु तिथि तो कब करें श्राद्ध? जानें पितृ पक्ष से जुड़े ये नियम

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इटारसी। पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक विशेष और महत्वपूर्ण काल है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करते हैं। यह माना जाता है कि इन दिनों में किए गए कर्मों से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर किसी को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि का सही-सही पता न हो, तो वे श्राद्ध कैसे करें? इस समस्या का समाधान धर्मशास्त्रों में बताया गया है, जिसके अनुसार कुछ विशेष तिथियां और नियम निर्धारित हैं।

नवमी तिथि (मातृ नवमी)

अगर किसी महिला पूर्वज (जैसे माता, दादी, नानी) की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो उनका श्राद्ध नवमी तिथि को किया जा सकता है। इस तिथि को ‘मातृ नवमीÓ भी कहते हैं, और यह विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जिनकी मृत्यु सुहागन के रूप में हुई हो।

चतुर्दशी तिथि (शस्त्राघात में मृत पूर्वजों का श्राद्ध)

यदि किसी पूर्वज की मृत्यु किसी दुर्घटना, शस्त्र, या हिंसक घटना में हुई हो, तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस तिथि को ‘शस्त्राघात चतुर्दशी’ के नाम से भी जाना जाता है।

सर्वपितृ अमावस्या (अमावस्या श्राद्ध)

यह पितृ पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। अगर किसी भी पूर्वज की मृत्यु तिथि का बिल्कुल भी पता न हो, तो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को किया जा सकता है। इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन भी माना जाता है, जब सभी पितरों को विदाई दी जाती है। इस दिन श्राद्ध करने से सभी पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

पितृ पक्ष से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण नियम

    • श्राद्ध का समय : श्राद्ध हमेशा दोपहर के समय (अपरान्ह काल) में ही किया जाना चाहिए।
    • ब्राह्मणों को भोजन : श्राद्ध के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना एक महत्वपूर्ण क्रिया है।
    • साफ-सफाई : श्राद्ध करने से पहले घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।
    • खान-पान : श्राद्ध के दिनों में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
    • तिल का उपयोग : श्राद्ध कर्म में काले तिल का विशेष महत्व है। इन्हें जल में मिलाकर तर्पण किया जाता है।
      इन नियमों का पालन करके, व्यक्ति अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दे सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

    Rohit Nage

    Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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