इटारसी। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) का 61वां स्थापना दिवस समारोह द्वारका बस्ती के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नगर प्रचारक जितेंद्र सरेयाम ने हिंदुओं को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद हुई हिंसा और उससे उपजी चुनौतियों के कारण वीएचपी की स्थापना की गई थी, लेकिन आज भी हमें ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरेयाम ने अपने संबोधन में कहा कि वीएचपी की स्थापना राष्ट्र, धर्म और हिंदुत्व की रक्षा के लिए हुई है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश की सेवा और सुरक्षा के साथ-साथ संस्कारों की रक्षा करना भी संगठन का लक्ष्य है। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि क्या वे हिंदुत्व के लिए खड़े हैं और कहा कि हमें उन्हें महापुरुषों के बलिदान और उनकी गाथाओं के बारे में बताना होगा।उन्होंने यह भी कहा कि दैवीय आपदाओं के दौरान संगठन हमेशा सबसे आगे रहता है। सरेयाम ने समाज में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर चिंता जताई और कहा कि हिंदू बहनों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे अपनी बेटियों को अच्छे संस्कार दें।
वीएचपी के जिलाध्यक्ष डॉ. सुभाष दुबे ने बताया कि वीएचपी की स्थापना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मुंबई के सांदीपनि आश्रम में संतों, गुरु गोलवलकर और स्वामी चिन्मयानंद जैसे महापुरुषों की उपस्थिति में हुई थी। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य हिंदू समाज को सशक्त बनाकर उसे संगठित और जागृत करना है ताकि हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा की जा सके।
कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री चेतन सिंह राजपूत ने किया, और अतिथियों का स्वागत जिला प्रचार प्रसार प्रमुख अनूप तिवारी ने किया। इस दौरान वीएचपी, बजरंग दल, मातृशक्ति और दुर्गावाहिनी के कई कार्यकर्ता और सदस्य मौजूद थे।इस समाचार रिपोर्ट को आप अपनी ज़रूरत के अनुसार और भी विस्तृत या संक्षिप्त कर सकते हैं।









