इटारसी। आज केसला ब्लॉक के ग्राम बड़चापड़ा में पांच गांवों के ग्रामीणों ने पेसा कानून के तहत एक महत्वपूर्ण ग्राम सभा का आयोजन किया। यह सभा तवा बांध के बैकवाटर में मिले एक बाघ के शव के बाद वन विभाग द्वारा की जा रही संदिग्ध कार्रवाई के विरोध में बुलाई गई थी।
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाघ का शव मिलने के बाद जब उन्होंने वन विभाग की जांच में पूरा सहयोग दिया, तो विभाग ने बाद में उनके साथ ज्यादती शुरू कर दी। ग्रामीणों के अनुसार, वन विभाग की टीम ने रात में उनके घरों में तलाशी ली, और जिन लोगों पर शक था, उन्हें जबरदस्ती उठाकर ले गए। आरोप है कि हिरासत में लिए गए ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई, साथ ही उन्हें झूठे केस में फंसाने और कुत्तों से कटवाने की धमकी भी दी गई। जिन ग्रामीणों को हिरासत में लिया उनमें दशरू चौहान, साधुराम कोरकू, राजू कोरकू, गुलाब सिंह बारस्कर, मोटू कोरकू, रमेश मावासे, और कुम्पा कोरकू शामिल थे।
हमारा गाँव संगठन के संयोजक दुर्गेश धुर्वे और योजना प्रमुख जयसिंह बारस्कर ने वन विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में दुर्गेश धुर्वे ने अधिकारियों को पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के तहत ग्राम सभा की शक्तियों के बारे में जानकारी दी, ताकि उन्हें ग्रामीणों के अधिकारों का एहसास हो सके। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें यह चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग नियम विरुद्ध तरीके से ग्रामीणों को धमकाना या परेशान करना जारी रखता है, तो ग्राम सभा उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित करके न्यायालय की शरण लेगी। प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस तनाव के कारण कोई आंदोलन होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।
वन विभाग की ओर से तीन रेंजर, पीएन ठाकुर, विजय बारस्कर, और आरबी पाठक, डॉग स्क्वायड टीम के साथ उपस्थित थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि किसी को धमकाया नहीं जाएगा और सहयोग करने वालों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि बाघ से संबंधित कोई भी गुप्त सूचना देने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस बैठक में संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ सरपंच मूलचंद कासदे और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।









