इटारसी। कल, 30 अगस्त को संतान सप्तमी है, जो माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।
संतान सप्तमी का महत्व
संतान सप्तमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को किया जाता है। इसे अपराह्न पूजा का व्रत भी कहते हैं, क्योंकि यह दोपहर के समय किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन माताओं के लिए होता है जो अपने बच्चों के कल्याण, सुरक्षा और उनके जीवन में आने वाली हर बाधा को दूर करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
पुराणों के अनुसार, यह माना जाता है कि जो माताएं पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ इस व्रत को करती हैं, उनकी संतान को लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। इसके साथ ही, यह व्रत निःसंतान दंपतियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
महिलाएं क्यों करती हैं यह व्रत?
महिलाएं यह व्रत अपनी संतानों की रक्षा के लिए करती हैं। यह व्रत माताओं और उनकी संतानों के बीच के अटूट प्रेम और भावनात्मक बंधन को दर्शाता है। इस दिन माताएं पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखकर शिव-पार्वती से अपनी संतान की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। यह व्रत संतान के जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने और उन्हें एक सफल और खुशहाल जीवन देने की कामना के साथ किया जाता है।
कैसे होती है पूजा?
संतान सप्तमी की पूजा विधि सरल लेकिन महत्वपूर्ण है।
- सुबह स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा की तैयारी: पूजा के लिए एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- संकल्प: व्रत का संकल्प लें और अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख की कामना करें।
- चौकी सजावट: चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर चावल का ढेर रखें।
- अर्घ्य और कलश: पूजा स्थल पर एक कलश स्थापित करें और उसमें जल, रोली, अक्षत, और सुपारी डालें।
- पूजन: भगवान शिव और माता पार्वती को फूल, फल, और धूप-दीप अर्पित करें।
- मुख्य प्रसाद: इस पूजा का मुख्य प्रसाद मीठे पुए या पूड़ी होते हैं। पुए या पूड़ियों की माला बनाई जाती है और पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।
- कलावा: पूजा के दौरान महिलाएं अपने हाथ में एक पवित्र कलावा भी बांधती हैं, जो संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- कथा: व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
आवश्यक पूजा सामग्री
पूजा के लिए आपको ये सामग्री चाहिए होगी: - भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर
- रोली, चावल (अक्षत), हल्दी
- पवित्र जल (गंगाजल हो तो बेहतर)
- धूप, दीप, और अगरबत्ती
- फूल और मौसमी फल
- पान और सुपारी
- नारियल
- कलावा
- मीठे पुए या पूड़ियां (सात या 14 की संख्या में)
- नारियल से बनी सामग्री जिसे प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
संतान सप्तमी की पूजा के लिए अपराह्न का समय सबसे शुभ माना जाता है। - सप्तमी तिथि का आरंभ: 29 अगस्त, 2025 को शाम 07:12 बजे
- सप्तमी तिथि का समापन: 30 अगस्त, 2025 को शाम 08:34 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: 30 अगस्त को दोपहर 01:45 बजे से शाम 04:12 बजे तक।
इस दौरान पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।









