ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है जिसका धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपना विशेष महत्व है। हम आपको आज 7 सितंबर, 2025 के चंद्र ग्रहण से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व चंद्र ग्रहण को लेकर भारतीय संस्कृति में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। सूतक काल को अशुभ माना जाता है, जो ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
- शुभ कार्य वर्जित : सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश नहीं किया जाता।
- भोजन और पूजा : इस समय भोजन बनाना और ग्रहण करना वर्जित होता है। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और पूजा-पाठ नहीं होता।
- गर्भवती महिलाएं : गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ग्रहण का शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्हें घर से बाहर न निकलने और नुकीली चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।
- उपाय : ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और भजन-कीर्तन करने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है।
वैज्ञानिक और भौगोलिक महत्व
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।

भूगोल : इस घटना के दौरान चंद्रमा धीरे-धीरे काला होता जाता है और कुछ समय के लिए लाल या नारंगी रंग का भी दिखाई देता है, जिसे ब्लड मून कहते हैं। यह वैज्ञानिक रूप से प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering) के कारण होता है।
सामाजिक महत्व
चंद्र ग्रहण समाज में जागरूकता और एकजुटता का अवसर भी प्रदान करता है। लोग इन दिनों धार्मिक अनुष्ठानों और दान-पुण्य के माध्यम से एक-दूसरे के करीब आते हैं। यह खगोलीय घटना लोगों को प्रकृति और ब्रह्मांड के बारे में जानने के लिए प्रेरित करती है।
सावधानियां और उपाय
- सूतक काल के नियम : गर्भवती महिलाओं, बीमारों और वृद्धों को सूतक काल के कठोर नियमों से छूट दी गई है।
- ग्रहण के दौरान : इस दौरान तरल पदार्थ, जैसे पानी और दूध, में तुलसी के पत्ते डालकर उन्हें दूषित होने से बचाया जा सकता है।
- ग्रहण के बाद : ग्रहण समाप्त होने पर घर की साफ-सफाई, स्नान और दान-पुण्य अवश्य करें। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
समय और सूतक काल
आज 7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा।
- ग्रहण का समय ग्रहण का आरंभ : रात 9 बजकर 57 मिनट पर
- ग्रहण का मध्य काल : रात 11 बजकर 41 मिनट पर
- ग्रहण की समाप्ति : रात 1 बजकर 26 मिनट पर (8 सितंबर)
- ग्रहण की कुल अवधि : लगभग 3 घंटे 28 मिनट
- सूतक काल चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लगता है।
- सूतक काल का आरंभ : आज दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से
- सूतक काल की समाप्ति : ग्रहण के साथ, यानी देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर (8 सितंबर)
सूतक काल के दौरान, पूजा-पाठ, भोजन पकाने और खाने जैसे कुछ कार्य वर्जित माने जाते हैं। हालांकि, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए इन नियमों में छूट होती है।










