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नापतौल विभाग का कारनामा : लाखों का मोबाइल टेस्टिंग वाहन कबाड़ बनकर झाडिय़ों में धंसा मिला

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  • केंद्र सरकार के पैसों से खरीदे कीमती वाहन को अधिकारियों ने लावारिस हालत में छोड़ा

इटारसी। केंद्र सरकार की विशेष योजना के तहत प्रदेश के चार जिलों को आवंटित किया लाखों रुपये का मोबाइल वे-ब्रिज टेस्टिंग किट वाहन नर्मदापुरम में कबाड़ बन चुका है। गहन खोजबीन के बाद यह कीमती वाहन नगर से दूर इटारसी के चौपाल सागर के पास झाडिय़ों और कीचड़-पानी में लावारिस हालत में धंसा हुआ पाया गया। इस पूरे मामले ने नापतौल विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महत्वपूर्ण था यह जांच वाहन

यह मोबाइल टेस्टिंग किट वाहन एक चलती-फिरती जांच मशीन थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले भर में लगे तौल कांटों (वे-ब्रिज) पर होने वाले भ्रष्टाचार और वजन को लेकर होने वाले विवादों पर अंकुश लगाना था।

  • उपयोगिता : किसानों और व्यापारियों द्वारा अक्सर यह आरोप लगाए जाते हैं कि तुलाई में गड़बड़ी हो रही है। यह मोबाइल किट मौके पर जाकर तौल कांटों की सटीक जांच कर सकती थी, जिससे भ्रष्टाचार पर सीधे लगाम लगती।
  • आवंटन : यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी और प्रदेश में इंदौर, जबलपुर, शहडोल और नर्मदापुरम जिले को इस महत्वपूर्ण वाहन के लिए चुना गया था।

अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

जब इस कीमती सरकारी संपत्ति के बारे में नापतौल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी मांगी गई, तो किसी ने भी ठोस जवाब नहीं दिया। अधिकारियों के जवाब लगातार बदलते रहे कि गाड़ी खराब है, गाड़ी सुधारने गई है, इसके लिए भोपाल मुख्यालय से बात करें। तत्कालीन सहायक नियंत्रक ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह उनके कार्यकाल का मामला नहीं है और वाहन सुधरने गया है। अभी की स्थिति पर उन्होंने मुख्यालय से कार्यवाही चलने की बात कहकर जवाब से बचने की कोशिश की।

जांच में वाहन की बदहाली का खुलासा

अधिकारियों के टालमटोल भरे जवाबों के बाद, इस वाहन की खोज शुरू की। आखिरकार, यह कीमती मोबाइल टेस्टिंग किट वाहन इटारसी में चौपाल सागर के पास झाडिय़ों के बीच कीचड़ में धंसा हुआ मिला, जो बेहद गंभीर और लावारिस हालत में था।

खड़े हुए गंभीर सवाल

इस बदहाल और लावारिस वाहन को देखकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनकी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।

  • लाखों रुपये का यह मोबाइल टेस्टिंग वाहन आखिर चौपाल सागर तक कैसे पहुंचा?
  • क्या इसका कभी उपयोग हुआ या यह शुरू से ही लावारिस था?
  • यदि यह खराब है तो इतने वर्षों में इसे सुधरवाया क्यों नहीं गया?
  • यदि वाहन अनुपयोगी था, तो इसे वापस मुख्यालय क्यों नहीं भेजा?
  • क्या किसी साजिश के तहत जांच वाहन को निष्क्रिय किया है ताकि तौल कांटों पर हो रहे भ्रष्टाचार की जांच न हो सके?

यह स्थिति तब सामने आई है जब नापतौल विभाग पर अक्सर पेट्रोल-डीजल और अन्य सामग्रियों की तुलाई में अनियमितता के आरोप लगते रहे हैं। जनता और विक्रेता के बीच विश्वास की कड़ी जोडऩे वाले इस विभाग की लापरवाही, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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