- रोहित नागे, इटारसी

नर्मदापुरम के पाहनवरी ग्राम में सोमवार को हुई दुखद घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली पर एक घातक सवालिया निशान है। आउटसोर्स कर्मचारी रामप्रसाद भल्लावी की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों और प्रक्रियाओं का पालन इस विभाग के लिए महज कागजी खानापूर्ति है, जिसे ताक पर रखकर इंसानी जान से खिलवाड़ किया जाता है।
परमिट मिला, फिर भी मौत मिली, किसकी चूक?
रामप्रसाद भल्लावी की मौत का कारण सीधा और स्पष्ट है, मानवीय लापरवाही। जब कर्मचारी ने गुर्रा सब स्टेशन से बाकायदा 4:30 बजे परमिट लिया था, तो यह विभाग की लिखित गारंटी थी कि वह लाइन पूरी तरह से बंद करके सुरक्षित रूप से खंभे पर काम कर सकता है। लेकिन, काम शुरू होते ही लाइन में अचानक करंट दौड़ गया। यह तथ्य बिजली कंपनी के दावों की धज्जियां उड़ाता है। यदि गुर्रा सब स्टेशन से लाइन बंद थी, जैसा कि डीजीएम संदीप पांडे स्वयं स्वीकार करते हैं, तो करंट कहां से आया? क्या यह किसी दूसरे सब स्टेशन से इंटरकनेक्शन की घातक चूक थी? या फीडर को आइसोलेट करने की प्रक्रिया में कहीं घोर लापरवाही बरती गई? यह सवाल साधारण नहीं है, यह विभागीय प्रक्रिया के भीतर छिपी गैर-जिम्मेदारी को उजागर करता है।
यह स्वीकार करना होगा कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही है। विभाग का कोई जिम्मेदार व्यक्ति जानता था कि लाइन पर एक आदमी काम कर रहा है, और फिर भी सप्लाई चालू कर दी गई। यह सीधा-सीधा एक जवान जान लेने का मामला है, जिसकी गहन जांच होनी चाहिए और दोषी को केवल स्थानांतरण या जांच के नाम पर बरी नहीं किया जाना चाहिए।
मुआवजा : आउटसोर्स कर्मचारी के लिए क्या है नियम?
डीजीएम द्वारा मृतक के परिवार को करीब 9 लाख रुपये की मदद का भरोसा दिया जाना स्वागत योग्य कदम हो सकता है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है और इससे भी महत्वपूर्ण है कि इसकी कानूनी वैधता क्या है। आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले में, बिजली कंपनी उन्हें सीधे कर्मचारी नहीं मानती। उनकी सुरक्षा और मुआवजे की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ठेकेदार की होती है।
नियमों की जटिलता : कंपनी के नियमित कर्मचारियों के लिए अनुकंपा नियुक्ति और स्पष्ट मुआवजा नियम हैं, लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए अक्सर ठेकेदार के बीमा और श्रम कानूनों के तहत ही सीमित मुआवजा मिलता है।
सवाल : क्या 9 लाख रुपये की यह राशि ठेकेदार के बीमा कवर से दी जा रही है, या क्या यह विभाग अपने सामाजिक दायित्व के तहत अनुग्रह राशि के रूप में दे रहा है?
आवश्यकता : बिजली कंपनी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ठेकेदार के पास सभी कर्मचारियों के लिए ईएसआईसी और पीएफ के साथ-साथ पर्याप्त जीवन बीमा कवर हो। रामप्रसाद भल्लावी के परिवार को तुरंत अनुग्रह राशि के अलावा, ठेकेदार द्वारा देय सभी वैधानिक लाभ मिलने चाहिए।
यह स्पष्ट है कि एक आउटसोर्स कर्मचारी को 9 लाख रुपए की मदद देना एक जटिल प्रक्रिया है, और कहीं ऐसा न हो कि यह वादा भी केवल ग्रामीणों का गुस्सा शांत करने की अस्थायी कवायद बनकर रह जाए।
आक्रोश की आग और जांच की खानापूर्ति
ग्रामीणों और किसान संगठनों का आक्रोश जायज है। उन्हें डर है कि हर बार की तरह इस बार भी डीजीएम द्वारा दिए गए जांच के आदेश केवल मामले को ठंडे बस्ते में डालने की खानापूर्ति साबित होंगे। जब तक दोषी अधिकारी या कर्मचारी, जिसने लाइन चालू करने का आदेश दिया, सस्पेंड नहीं किया जाता और उस पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज नहीं होता, तब तक यह विभाग भविष्य में भी ऐसी ही लापरवाही दोहराता रहेगा।
रामप्रसाद की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, यह एक सिस्टम की विफलता है जो अपने कर्मचारियों, विशेषकर आउटसोर्स किए गए कमजोर तबके, की सुरक्षा को कोई महत्व नहीं देता। बिजली विभाग को अब कागज की जांच से ऊपर उठकर, अपने कार्यस्थल पर शून्य-लापरवाही की नीति लागू करनी होगी। वरना, परमिट की हर पर्ची अगले शिकार का मृत्यु-पत्र साबित होती रहेगी।









