इटारसी। होटल द पार्क के सामने बना ओवरब्रिज जनता की परेशानी का सबब बन गया है। इस भीषण भ्रष्टाचार का सीधा खामियाजा अब क्षेत्र के किसान, व्यापारी और ट्रक मालिक भुगत रहे हैं। धान के पीक सीजन में ब्रिज पर बड़े वाहनों की आवाजाही बंद होने से व्यापारी लाचार और ट्रांसपोर्टर बेबस थे।
मरम्मत का काम शुरू, उम्मीद की किरण
भ्रष्टाचार की मार झेल रहे हाईवे ओवर ब्रिज की मरम्मत आज से प्रारंभ हो गई है। आंदोलनों और जनता के आक्रोश का दबाव आखिरकार रंग लाया। जेसीबी से पिछले दिनों तोड़े गए रोड का मटेरियल हटाकर समतलीकरण किया गया। यह शुरुआत व्यापारी, किसान और ट्रांसपोर्टर के लिए राहत की पहली सांस है। काम शुरू होने से एक उम्मीद तो जगी है, लेकिन रेलवे और प्रशासन को अब पूरी गंभीरता दिखानी होगी। लेटलतीफी होगी या तेजी? यह आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। नागरिकों की अपील है कि काम बिना रुके जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, अधिकारी-ठेकेदार का खेल
स्थानीय अधिकारी समस्या से पल्ला झाड़ चुके हैं, जबकि भोपाल में बैठे उच्चाधिकारी भी भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार एक अधिकारी के दबाव में आकर मरम्मत में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस भ्रष्ट अधिकारी की जबलपुर जोन के एक बड़े अफसर से तगड़ी सांठगाठ है, जिसके चलते जनता की परेशानी पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। सांसद, विधायक के विरोध के बाद अब कांग्रेस के आंदोलन से यह मुद्दा और बड़ा बन चुका है। ब्रिज बंद होने का सर्वाधिक नुकसान धान खरीद रहे व्यापारियों को हो रहा है।
बेबसी का सफर, दोगुना भाड़ा
ब्रिज बंद होने से व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक कमर टूट गई है। 1500 प्रति फेर बढ़ा भाड़ा बढ़ा, 8 किलोमीटर लंबा फेर लगाकर बड़े वाहनों को अब निटाया से घुमाकर ले जाना पड़ रहा है, जिससे दोगुना भाड़ा देना पड़ रहा है। संकरे आंतरिक मार्र्गों से गुजरने के कारण अंडरलोड से भी कम माल भरकर जाना पड़ रहा है। आंतरिक मार्गों से गुजरने के कारण ग्रामीणों से कई बार विवाद हो रहे हंै।









