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प्रकृत्ति का आलिंगन: ‘कोहरे की चादर’ और ‘पहली बार’ कंपकंपाती सर्द हवाएं, नर्मदांचल में अब ‘पहाड़ों सा मौसम’

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  • मंजूराज ठाकुर

इटारसी। आज की सुबह एक काव्यात्मक रहस्य लेकर आई। आसमान से उतरकर, कोहरे की एक सफेद, शांत चादर में लिपटा यह दिन, मौसम के एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे गया।

मौसम की बदली करवट

आज सुबह जैसे ही लोगों की आंख खुली, उन्होंने इस सीजन के पहले घने कोहरे को छाया हुआ पाया। यह सिर्फ दृश्य नहीं था, बल्कि एक अनुभूत सत्य था। पहली बार, इस सीजन की अब तक की सबसे तेज ठंड महसूस हुई।

  • तीखी हवा : हवा में एक अजीब सी ‘तीखी ठंडक’ थी, मानो किसी ने ठंडी बर्फीली हवाओं की धार खोल दी हो। इन बर्फीली हवाओं ने शरीर को कंपकंपा दिया, जिसने लोगों को गर्म कपड़ों और अलाव की ओर रुख करने पर मजबूर किया।
  • पहाड़ी असर : मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल स्थानीय नहीं है। सुदूर पहाड़ों के मौसम का असर अब नर्मदांचल के मैदानी इलाकों में स्पष्ट रूप से महसूस होने लगा है, जो इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति की शक्तियां भौगोलिक सीमाओं को नहीं मानतीं।

आगामी दिनों का पूर्वानुमान

वर्तमान ठंडक तो मात्र एक प्रस्तावना है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ठंड और भी अधिक तेज होने की संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह वह समय है जब नर्मदान्चल पूर्ण रूप से शीत ऋतु के आलिंगन में समा जाएगा।

दार्शनिक विमर्श

यह केवल मौसम नहीं है, यह समय के साथ प्रकृति का नृत्य है। कोहरा एक ‘चादरÓ है, जो दुनिया को क्षण भर के लिए अपने आगोश में लेकर हमें धीमी गति से जीवन जीने का निमंत्रण देती है। यह ‘पहली बारÓ की ठंडक हमें हमारे घर की गरमाहट और जीवन के मूलभूत सुखों का महत्व समझाती है।

  • सतर्कता : नर्मदांचल के निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे स्वयं को और विशेष रूप से बच्चों एवं वृद्धों को इस कंपकंपाती ठंड से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम करें।

मौसम की स्थिति

  • आज 10 डिग्री सेल्सियस 22-25 डिग्री सेल्सियस, घना कोहरा/कोल्ड डे कंडीशन।
  • कल 6-9 डिग्री सेल्सियस, 23-26 डिग्री सेल्सियस, सुबह के समय शीत लहर के साथ तीव्र ठंड।
  • परसों 7-10 डिग्री सेल्सियस 24-27 डिग्री सेल्सियस, आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना। ठंड बरकरार।

मुख्य रुझान और चेतावनी

  • तीव्र ठंडक- रात और सुबह के समय शीत लहर की स्थिति बने रहने की प्रबल संभावना है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो जंगल या नदी के किनारे हैं। न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहने की उम्मीद है।
  • घना कोहरा – अगले 24 से 48 घंटों में नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहेगा।
  • प्रभाव – इससे सड़कों और रेलवे मार्गों पर दृश्यता में भारी कमी आ सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होगा।
  • दिन का तापमान – अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना रहेगा, लेकिन कोल्ड डे की स्थिति बनी रह सकती है, जहां दिन में भी तेज ठंड महसूस होगी।
  • पहाड़ी असर – उत्तर भारत के पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण संभाग में ठंडक का प्रकोप जारी रहेगा।

एहतियाती सलाह

  • यातायात – वाहन चालकों को कोहरे के दौरान फॉग लाइट्स का उपयोग करने और गति धीमी रखने की सलाह दी जाती है।
  • स्वास्थ्य – अत्यधिक ठंड से बचने के लिए गर्म और ऊनी कपड़े पहनें। बच्चों और वृद्धों को सुबह और रात में घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।

नर्मदापुरम संभाग के प्रमुख स्थल

कोहरे की चादर में लिपटे आस्था और प्रकृति के स्थल

नर्मदा नदी के किनारे बसा यह संभाग, जब घने कोहरे की चपेट में आता है, तो यहां के स्थल एक रहस्यमय और शांत वातावरण में डूब जाते हैं।

  • पचमढ़ी – सतपुड़ा की रानी
  • प्रभाव – पचमढ़ी, जो स्वयं ही एक हिल स्टेशन है, सर्दियों में अपनी चरम सुंदरता पर होता है। यहां का कोहरा और भी घना और सर्द होता है।

रोचकता

  • दृश्य – प्रियदर्शिनी पॉइंट (फोर्सेथ पॉइंट) या धूपगढ़ जैसे स्थानों से सूर्योदय के समय कोहरे का दृश्य देखना अद्भुत होता है। ऐसा लगता है मानो घाटियां बादलों के समुद्र में तैर रही हों।
  • अनुभूति – यहां की गुफाओं और झरनों (जैसे जटाशंकर) के आसपास ठंड और नमी मिलकर एक शांत, बर्फीली सुगंध पैदा करती है, जो ध्यान और चिंतन के लिए उत्तम है।

सेठानी घाट, नर्मदापुरम

  • प्रभाव – नर्मदा नदी के किनारे बसे इस ऐतिहासिक घाट पर, सुबह के समय कोहरा सीधे नदी की सतह से ऊपर उठता है।

रोचकता

  • दृश्य – सुबह-सुबह, कोहरा नदी और घाट को इस तरह ढक लेता है कि दूर खड़े मंदिर और मूर्तियां धुंधली, छायादार आकृतियों के रूप में दिखाई देती हैं। आरती के समय घंटियों और मंत्रों की आवाज़, कोहरे की चुप्पी को चीरते हुए, एक दिव्य और आध्यात्मिक माहौल बनाती है।
  • आध्यात्मिक अर्थ – कई श्रद्धालु मानते हैं कि इस मौसम में नर्मदा जी की गोद में लिपटा कोहरा, उनकी शांत और रहस्यमय शक्ति का प्रतीक है।

तवा बांध

  • प्रभाव – विशाल जल भंडार के कारण, तवा बांध और उसके आसपास के क्षेत्र में मैदानी इलाकों की तुलना में कोहरा और नमी अधिक होती है।

रोचकता

  • सुरक्षा – कोहरे के कारण सुबह के समय बांध के आस-पास दृश्यता बहुत कम हो जाती है, जिससे यहां नौकायन और अन्य गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगानी पड़ सकती है।
  • प्रकृति प्रेमियों के लिए – कोहरे से ढंके जलाशय का किनारा, जहां दूर क्षितिज पर पानी और आकाश एक हो जाते हैं, फोटोग्राफी और शांत चिंतन के लिए एक शानदार पृष्ठभूमि प्रदान करता है।

हरदा और बैतूल के ग्रामीण अंचल

  • प्रभाव – ये क्षेत्र कृषि प्रधान होने के कारण, खेतों में नमी और पाले की संभावना बढ़ जाती है।

रोचकता

  • पाले का खतरा – घना कोहरा हटने के बाद खेतों में पाला जमने का खतरा रहता है, जिससे रबी की फसलों (जैसे गेहूं, चना) को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को इसके लिए विशेष उपाय करने पड़ते हैं।
  • जीवन शैली : इन अंचलों में, लोग ठंड से निपटने के लिए सामूहिक रूप से अलाव (धूनी) जलाते हैं, जो सामाजिक मेलजोल और ग्रामीण संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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