इटारसी। यात्री ट्रेनों में मोबाइल चोरी और उसके जरिए बैंक खातों में सेंध लगाने वाले अपराधियों के विरुद्ध पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना जीआरपी इटारसी द्वारा की गई वैज्ञानिक और तकनीकी विवेचना के आधार पर, न्यायालय ने एक शातिर अपराधी को विभिन्न धाराओं में कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
क्या था पूरा मामला?
30 अक्टूबर 2024 को एक यात्री ने रेल यात्रा के दौरान अपना मोबाइल फोन चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने न केवल फोन चोरी किया, बल्कि इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग कर फरियादी के नाम पर अवैध रूप से ऋण स्वीकृत कराया और बैंक खातों से पैसे भी निकाल लिए. वैज्ञानिक साक्ष्यों ने फंसाया जीआरपी इटारसी ने इस मामले में आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया।
तत्कालीन निरीक्षक रामस्नेही चौहान के नेतृत्व में टीम ने मोबाइल की सीडीआर, सीएएफ, आईएमईआई ट्रैकिंग, टावर लोकेशन और बैंक स्टेटमेंट जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जुटाए। इन साक्ष्यों के आधार पर सोहागपुर जिला नर्मदापुरम निवासी लीलाधर रघुवंशी की संलिप्तता प्रमाणित हुई। न्यायालय का फैसला और सजा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, इटारसी ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए 16 दिसंबर 2025 को आरोपी को दोषी करार दिया।
आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 305(सी): एक वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 अर्थदंड, धारा 318(4) एवं 238 क्रमश: एक वर्ष और तीन माह का सश्रम कारावास तथा कुल 2500 अर्थदंड, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 (सी)- एक वर्ष का सश्रम कारावास और 25,000 अर्थदंड की सजा सुनाई। इस सफल विवेचना के लिए न्यायालय द्वारा पुलिस की कार्यप्रणाली को सराहा गया। इस पूरी कार्रवाई में तत्कालीन निरीक्षक रामस्नेही चौहान, आरक्षक मनोज त्रिपाठी, प्रधान आरक्षक राजेश गढ़वाल और आरक्षक संतोष पटेल सायबर सेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।









