इटारसी। वृंदावन गार्डन में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन साध्वी राधादेवी ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान रुक्मिणी विवाह के मंगल गीतों पर भक्त झूम उठे और उत्सव जैसा माहौल रहा।
कथाव्यास साध्वी राधादेवी ने रुक्मिणी विवाह के मर्म को समझाते हुए कहा कि जहां सच्चा प्रेम होता है, वहां परमात्मा स्वयं व्यवस्था करते हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई “जाको प्रिय न राम वैदेही…” का उल्लेख करते हुए बताया कि जिसे ईश्वर से प्रेम नहीं है, वह चाहे कितना भी प्रिय क्यों न हो, उसका त्याग कर देना ही श्रेयस्कर है। रुक्मिणी जी ने श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम के कारण अपने भाई रुक्मी और अधर्मी शिशुपाल का विरोध किया और केवल प्रभु को अपना सर्वस्व माना। रुक्मिणी जी की पुकार पर प्रभु ने तुरंत आकर उनका वरण किया, जो यह दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों की लाज कभी नहीं जाने देते।
कथा के दौरान महामंडलेश्वर केशवदास सरदार नगर और महंत प्रज्ञानन्द तालनगरी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर जसवीर छावड़ा, शरद गुप्ता, मनोज सोनी, अशोक खंडेलवाल, जगदीश मालवीय, किशनलाल सेठी, और अंशुल अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









