- विधायक डॉ. शर्मा की मौजूदगी में हुआ समितियों का गठन
इटारसी। शहर के आस्था के केंद्र श्री बूढ़ी माता मंदिर में इस वर्ष 51 वें श्री शतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। 26 जनवरी से शुरू होने वाले इस विशाल धार्मिक अनुष्ठान की तैयारियों को लेकर शनिवार को मंदिर समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। मंदिर समिति अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन कर सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
कलश यात्रा के साथ होगा शंखनाद
महायज्ञ का शुभारंभ 26 जनवरी को कलश यात्रा के साथ होगा। यह यात्रा गुरुनानक दाल मिल स्थित माता महाकाली दरबार से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर पहुंचेगी। शोभायात्रा की मुख्य कमान जसबीर सिंह छाबड़ा को सौंपी गई है, जबकि पालकी और बग्गी सजावट का दायित्व अंकित तिवारी एवं मयंक तिवारी संभालेंगे।
विभिन्न समितियों को सौंपी गई कमान
बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष पंकज चौरे, सचिव जगदीश मालवीय और दीपक अठोत्रा की उपस्थिति में व्यवस्थाओं का विभाजन किया।
- कथा एवं पूजन : प्रतिदिन होने वाली श्रीमद्भागवत कथा एवं सत्संग की संपूर्ण व्यवस्था सत्संग परिवार देखेगा। पूजन-पाठ की जिम्मेदारी ओमप्रकाश यादव एवं उनकी टीम को दी गई है।
- भोजन एवं भंडारा : ब्राह्मण भोजन की व्यवस्था कृष्ण कुमार चौरे संभालेंगे। महायज्ञ के अंतिम दिन होने वाले भंडारे में प्रसाद वितरण के लिए महिला विंग की कमान मंजू ठाकुर और पार्षद गीता पटेल को दी गई है। पुरुषों की ओर से राहुल चौरे, मोहन मालवीय और उनकी टीम व्यवस्था संभालेगी।
- प्रबंधन एवं प्रचार : मेला समिति के प्रमुख दीपक अठोत्रा होंगे। प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार इंद्रपाल सिंह को और साउंड व्यवस्था नारायण सैनी को सौंपी है। कूपन व्यवस्था के लिए अशोक खंडेलवाल, शरद गुप्ता एवं टीम तैनात रहेगी।
- श्रद्धालुओं की सुविधा का रखा ध्यान : भीड़ प्रबंधन के लिए जागरण समिति में बसंत बत्रा और अंकित तिवारी रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साइकिल स्टैंड की जिम्मेदारी मुन्ना भाई और जूता स्टैंड की व्यवस्था शिवम व गोपाल सिद्धवानी की टीम देखेगी।
विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने बैठक में निर्देश दिए कि चूंकि यह आयोजन का 51 वा वर्ष है, अत: व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होनी चाहिए ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।









