इटारसी। नर्मदापुरम संभाग सहित इटारसी क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से जारी शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने रबी की फसलों पर अपना गहरा असर दिखाना शुरू कर दिया है। जहां एक ओर यह मौसम गेहूं उत्पादक किसानों के लिए अमृत बनकर आया है, वहीं दूसरी ओर चना उत्पादकों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
गेहूं के लिए वरदान साबित हो रही कड़ाके की ठंड
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में जो तापमान न्यूनतम 7-10 डिग्री सेल्सियस चल रहा है, वह गेहूं की फसल की बढ़वार के लिए सबसे उपयुक्त है। ठंड के कारण गेहूं के पौधों में फुटाव अधिक होता है। जितनी ज्यादा ठंड पड़ेगी, दाना उतना ही पुष्ट और वजनदार बनेगा। किसानों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा, तो इस बार गेहूं की बंपर पैदावार हो सकती है।
चने पर इल्ली का साया, किसानों की बढ़ी धडक़नें
गेहूं के विपरीत, चने की फसल के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। कोहरे और हवा में बढ़ी नमी ने कीटों के अनुकूल वातावरण तैयार कर दिया है। बादलों और नमी वाले मौसम में फली छेदक इल्ली का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। क्षेत्र के कई खेतों में चने के पौधों पर शुरुआती इल्लियां देखी गई हैं, जो कोमल पत्तियों और फूलों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विभाग और जानकारों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। गेहूं में हल्की सिंचाई करें और यूरिया की उचित मात्रा का प्रयोग करें। चना के खेतों की नियमित निगरानी करें। पक्षियों के बैठने के लिए टी आकार की खूंटियां लगाएं। इल्ली का प्रकोप दिखने पर इमामेक्टिन बेंजोएट या प्रोफेनोफॉस जैसे कीटनाशकों का विशेषज्ञों की सलाह पर छिडक़ाव करें। विशेषज्ञ का मत है कि वर्तमान मौसम गेहूं के लिए टॉनिक जैसा है, लेकिन चने के किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। कोहरे के कारण फफूंद जनित रोगों का भी खतरा रहता है, इसलिए सुबह के समय खेतों का निरीक्षण अवश्य करें।
अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण : मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो दिनों तक शीतलहर का प्रभाव जारी रह सकता है। पाला गिरने की स्थिति में किसानों को खेतों की मेड़ों पर धुआं करने की सलाह दी गई है ताकि तापमान को नियंत्रित रखा जा सके।








