इटारसी। समीपस्थ ग्राम तारारोड़ा में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। यहाड्ड देवी रत्नमणि द्विवेदी के पावन सानिध्य में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन भव्य कलश यात्रा और भागवत माहात्म्य के वर्णन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया।
कथा के प्रारंभ में तारा रोड़ा महिला मंडल और समस्त ग्रामवासियों ने एक विशाल कलश यात्रा निकाली। सिर पर मंगल कलश धारण किए महिलाएं और भक्ति गीतों पर झूमते श्रद्धालु ग्राम के मुख्य मार्गों से गुजरे, जिससे पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। यात्रा के पश्चात विधि-विधान से पोथी पूजन कर कथा का श्रीगणेश किया गया।
भागवत कथा : मोक्ष का सरल मार्ग

कथा व्यास देवी रत्नमणि द्विवेदी ने भागवत माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सर्व-पापनाशिनी और परम पवित्र है। उन्होंने शुकदेव जी और राजा परीक्षित के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि विधिपूर्वक एक सप्ताह तक इस कथा का श्रवण करने से मनुष्य को भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। कथा के श्रवण मात्र से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को नई चेतना मिलती है और वे भक्तों के चित्त को भगवान की ओर आकर्षित करते हैं।
कलयुग के प्रभाव से बचने का उपाय
सूत जी और राजा परीक्षित के संवाद को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि द्वापर युग के अंत में भगवान कृष्ण के बैकुंठ जाने के 30 वर्ष बाद पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हुआ। कलयुग केवल मनुष्य पर तभी हावी होता है जब वह धर्म से विमुख होता है। कलयुग के प्रभाव और पापों से बचने का सरल उपाय भगवान का निरंतर भजन और भागवत रूपी अमृत का पान करना है।
धुंधकारी और गोकर्ण के प्रसंग की चर्चा
कथा में यह भी बताया गया कि किस प्रकार गोकर्ण ने धुंधकारी को और सनकादि ऋषियों ने नारद जी को इस परम ग्रंथ का ज्ञान देकर दुखों से मुक्ति दिलाई थी। ग्राम तारारोड़ा में आयोजित इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जहां प्रतिदिन विभिन्न झांकियों और भजनों के माध्यम से कृष्ण लीलाओं का वर्णन किया जाएगा।









