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साठ सालों से नौ दिनों में, हर रूप की होती है पूजा अर्चना

साठ सालों से नौ दिनों में, हर रूप की होती है पूजा अर्चना

साठ सालों से नौ दिनों में, हर रूप की होती है पूजा अर्चना

भूपेंद्र विश्वकर्मा की विशेष रिपोर्ट नवरात्रि के छठवें दिन हमारी विशेष नवरात्रि कवरेज में हम आपको शहर की उस देवी प्रतिमा से रूबरू करवाएंगे जिसकी स्थापना एक विभाग के लगभग छः सैकड़ा कर्मचारियो ने शुरू की थी और आज शहर की विशेष देवी प्रतिमाओं में यहां विराजने वाली प्रतिमा की चर्चाएं होती है।

रेल डाक सेवा उपमंडल इटारसी के कार्यालय परिसर में विराजने वाली माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा इस वर्ष अपने इकसठवें (61) वर्ष में विराजित  की गयी है। यहां विराजने वाली प्रतिमा स्थापना का इतिहास बहुत ही रोचक और हिंदुत्व की अलख जगाने वाला है। वर्ष 1957 के आसपास विभाग के लगभग छः सौ पचास कर्मचारियों ने स्वयं अपने विवेक से देवी माँ की प्रतिमा स्थापना को मूर्त रूप दिया। हालाँकि आज बदलते परिवेश के चलते वर्तमान में सत्तर से ज्यादा कर्मचारी प्रतिमा स्थापना में अपना तन-मन-धन से सहयोग करते हैं।
यहां एक और ख़ास बात यह है कि यहां शुरुआत से ही माँ गौरी के हर रूप को विभिन्न वर्षों में स्थापित किया गया है। यहां उपस्थित कर्मचारी सदस्यों ने बताया कि यहां माँ को हर रूप में पूजा जाता है। एक सदस्य ने बताया कि यहां कभी भी किसी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप नहीं होता है। साथ ही सभी कर्मचारी सदस्य स्वयं ही राशि एकत्रित कर प्रतिमा स्थापित करते हैं। हालांकि विभाग और प्रशासन का कई बातों में सहयोग मिलता है जो आवश्यक और अतुलनीय है।
शुरुआत से ही ज्यादातर वरिष्ठ कर्मचारी सदस्य ही विशेष रूप से यहां प्राण-प्रतिष्ठा एवं पूजन-अर्चन में सहयोग देते हैं साथ ही समयानुसार आने वाले नौजवान सदस्य भी निरंतर माँ की सेवा में अपना सहयोग देते हैं।

स्कूली छात्राओं का कन्या् भोज
एक और बात इस प्रतिमा को शहर में बाकी प्रतिमाओं से अलग करती है वो यह कि यहां शुरुआत से ही कार्यालय के समीप स्थित कन्या स्कूल की छात्राओं के लिए विशेष रूप से कन्याभोज सप्तमी तिथि को आयोजित किया जाता है। ताकि वे सभी भोज में शामिल हो सकें। प्रशासन द्वारा स्कूलों में अष्टमी तिथि से छुट्टी दे दी जाती है  इसलिए सभी देवीस्वरूप कन्याएं सप्तिम को यहां भोजन ग्रहण कर पाती हैं।

रोचक और सत्य बातें जो आपको जानना जरूरी है

•यहां विराजने वाली माँ की प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी समिति के सदस्यों ने नहीं बल्कि डाक विभाग के छः सौ पचास कर्मचारियो ने प्रारम्भ की थी। साथ ही आज भी कोई बाहरी सदस्य इसमें शामिल नहीं है। आज भी जो कर्मचारी और अधिकारी यहां पोस्टिंग पर आते है वही प्रतिमा स्थापना को आज तक बढ़ाते आ रहे है।

•यहां विराजने वाली प्रतिमा प्रतिवर्ष माँ के विभिन्न आकर्षक स्वरूपों में विराजती है। साथ ही यहां प्रतिवर्ष पुराणों से जुडी एक घटना का झांकी का आकर्षक प्रदर्शन भी किया जाता है।

•देश में पुराने समय से आर्थिक नीतियों के बदल जाने पर भी यहां आज भी सभी सदस्य स्वयं के वेतनमान से ही अधिक से अधिक राशि दान देते हैं साथ ही कुछ सदस्य तो ऐसे है जो सालभर मूर्तिस्थापना के लिए कुछ राशि एकत्रित करते हैं।

•प्रतिमा की भव्यता और ख्याति की बात करें तो मुख्य बाजार क्षेत्र में विराजने वाली देवी प्रतिमाओं में यहां की प्रतिमा का अपना अलग ही महत्व हैं। जब भी शहरवासी शहर में प्रतिमाओं के दर्शन के लिए निकलते हैं तो यहां विराजित प्रतिमा उनकी सूची में मुख्य रूप से शामिल होती है।

•यहां विराजने वाली देवी प्रतिमा को शहर में सर्वाधिक सादगी और शांति से विराजने वाली प्रतिमाओं में उत्कृष्ट माना जाता है।

इस वर्ष का आकर्षण
हर वर्ष की तरह ही इस वर्ष में नवरात्रि की सप्तमी तिथि को विशाल कन्याभोज का आयोजन किया जायेगा। साथ ही अंतिम दिवस हवन-पूजन व भंडारे-प्रसादी का वितरण किया जायेगा।

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