टिड्डी दल के रोकथाम हेतु प्रशासन ने की प्रभावी कार्यवाही

टिड्डी दल के रोकथाम हेतु प्रशासन ने की प्रभावी कार्यवाही

होशंगाबाद। टिड्डी दल पर 99 फीसद नियंत्रण हो चुका है, शेष भी बुधवार को सुबह खत्म कर दिये जाएंगे। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये कीट अभी पंद्रह दिन अंडे देने की स्थिति में नहीं है। यह बहुत छोटा दल था जो कई जगह से टूटकर इस जिले तक आ पहुंचा था। यदि इसके बाद भी किसानों को कहीं छोटा दल दिखे जहां प्रशासन नहीं पहुंच पाया हो तो वे स्वयं पर भी इस पर नियंत्रण कर सकते हैं।
इन बातों से किसानों को आश्वस्त किया है, कृषि वैज्ञानिक एवं कंट्रोलर टिड्डी दल नियंत्रण संस्था जोधपुर डॉ. रवि छापरे ने। उनके नेतृत्व में यहां टिड्डी दल के सफाये का अभियान चला है। आज तीसरे दिन भी टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्यवाही कर अधिक संख्या में टिड्डी दल पर नियंत्रण किया है।
विकासखंड सिवनीमालवा के ग्राम पापन, रामगढ़, अर्चनाग्राम, लुचगांव, उमरिया ग्राम में एसडीएम सिवनीमालवा रविशंकर राय, उप संचालक कृषि जितेन्द्र सिंह, तहसीलदार दिनेश सावले, जनपद सीईओ दुर्गेश भूमरकर, सहायक संचालक कृषि योगेन्द्र बेड़ा सहित प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की गई। उप संचालक कृषि जितेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्व तैयारियां सुनिश्चित कर चार फायर बिग्रेड एवं ट्रैक्टर चलित पावर स्प्रेयर से लेम्डासाइथ्रोलिन कीटनाशक दवा से छिड़काव कर भारी संख्या में टिड्डी दल पर नियंत्रण किया गया है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु स्थानीय कृषकों द्वारा भी पूर्ण सहयोग प्रदाय किया गया।

विदेशी मूल की हैं टिड्डियां
टिड्डियां मूलत: ईरान-ईराक की हैं और वहीं से पाकिस्तान होते हुए हिन्दुस्तान में आती हैं। यह होशंगाबाद जिले में पहली बार आयी हैं। बल्कि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में ही इनको पहली बार देखा गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. छापरे के नेतृत्व में पिछले तीन दिन से चल रहे अभियान में 99 फीसद टिड्यिों का सफाया हो चुका है। उपसंचालक कृषि जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अब कहीं जहां प्रशासन की टीम नहीं पहुंच सकीं, वहां कुछ मात्रा में बची हों तो उनको भी बुधवार तक खत्म कर लेंगे। उन्होंने बताया कि विभाग की पूरी टीम टिड्डियों पर नजर रख रही है, शाम को ये जहां भी बैठती हैं, वहां की जानकारी टीम से मिलती है और सुबह से उनके खात्मे का अभियान शुरु हो जाता है। क्योंकि ये शाम को एक जगह बैठी तो फिर वहां से नहीं उठती हैं, सुबह तक उनको खत्म कर लेते हैं।

यहीं आकर जम गयी हैं
टिड्डी दल को यहां अनुकूल माहौल मिल गया था। आमतौर पर ये एक जगह इतने लंबे वक्त तक नहीं टिकती हैं। लेकिन यह छोटा दल था जो मूल दल से टूट गया था। ऐसे दल अधिक रन नहीं कर पाते हैं और यह भी ऐसा ही दल था जो यहां जम गया है। यहां उनको हरियाली, नर्मदा का तट, रेत मिल गयीं इसलिए यह दल यही जम गया जिसे प्रशासन की टीम मिलकर खत्म कर रही है। यहां प्रशासन को किसानों का भी भरपूर सहयोग मिला है जिससे इन टिड्डियों का खात्मा करने में काफी आसानी हो रही है। प्रशासन जानकारी मिलने पर रातभर तैयारी करता है और अलसुबह आपरेशन प्रारंभ कर देता है। दो दमकल इटारसी, एक होशंगाबाद और एक सिवनी मालवा से मंगायी गई हैं जो इन पर तेज बौछारों से कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। यही कारण है कि यह मूंग की फसल पर नहीं उतरीं।

इनका कहना है…!
यहां आने के बाद देखा तो यह बहुत छोटा हिस्सा था जो पिछले स्थानों पर नियंत्रण के दौरान वहां से उड़कर यहां तक आ गया था। शासन, प्रशासन और स्थानीय किसान मुस्तैद हैं। रातभर तैयारी के बाद सुबह आपरेशन करते हैं, जिससे 99 फीसद नियंत्रण हो गया है, एकाध दिन में सब खत्म कर लेंगे। फिर भी यदि किसानों को कहीं दिखें तो चिंता न करें, स्वयं भी नियंत्रित कर सकते हैं।
डॉ. रवि छापरे, कृषि वैज्ञानिक टिड्डी दल नियंत्रण विशेषज्ञ

हमारा आपरेशन लगातार चला और 99 प्रतिशत नियंत्रण भी कर लिया है। हमारी टीम बराकर नजर रख रही है, जहां बैठती हैं, वहां की जानकारी उपलब्ध करा रही है, टीम की जानकारी के बाद हम रात में तैयारी करके सुबह इनको खत्म कर लेते हैं। एकाध दिन और चलेगा अभियान।
जितेन्द्र सिंह, उपसंचालक कृषि

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