इटारसी। यहां के ऐतिहासिक गांधी मैदान पर खेल इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। यहां आयोजित व्हीलचेयर क्रिकेट टूर्नामेंट न केवल रनों की बौछार का गवाह बना, बल्कि हौसलों की उस उड़ान का भी प्रतीक बना जिसे शारीरिक अक्षमता कभी नहीं रोक सकती।
आप पैरों पर खड़े हो जाइए, हम खेल रहे हैं…। व्हीलचेयर क्रिकेट खिलाडिय़ों की यह बात जब गांधी ग्राउंड में गूंजी, तो वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। नर्मदापुरम जिले में पहली बार आयोजित हो रहे दो दिवसीय व्हीलचेयर क्रिकेट टूर्नामेंट ने शहर को यह संदेश दिया है कि जज्बा अगर बड़ा हो, तो शरीर की बाधाएं मात्र एक शब्द बनकर रह जाती हैं।
मैदान पर गूंजा अंतरराष्ट्रीय अनुभव
नर्मदापुरम के गौरव और अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेटर जगदीश कुशवाहा ने अपनी खेल प्रतिभा से सबका दिल जीत लिया। भारत की ओर से श्रीलंका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके जगदीश ने आज गांधी ग्राउंड में शानदार शतक जड़ा। उन्होंने कहा, ऐसे आयोजनों से विकलांग खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन मिलता है। जनता को इन आयोजनों का समर्थन करना चाहिए ताकि हमारा उत्साह बढ़े।
स्टीफन हॉकिंग का उदाहरण
भोपाल संभाग के खिलाड़ी गजराज सिंह यादव ने इटारसी वासियों की सक्रिय सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों ने दिव्यांगों को कभी खुद से कम नहीं समझा। गजराज ने विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जिक्र करते हुए कहा, दिव्यांग किसी से कम नहीं हैं। अगर हमें इसी तरह का मंच मिलता रहा, तो हम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का तिरंगा और ऊंचा करेंगे।
आयोजन के मुख्य अंश
- नर्मदापुरम जिले के इतिहास में पहली बार व्हीलचेयर क्रिकेट का आयोजन हुआ।
- भोपाल, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग की तीन टीमें दमखम दिखा रही हैं।
आयोजन समिति के जितेंद्र ओझा ने भावुक होते हुए कहा कि इन खिलाडिय़ों की ऊर्जा देखते ही बनती है। पैरों पर चलने वाले लोगों को इनसे जीने का जज्बा सीखना चाहिए।
ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे
संस्था का संकल्प है कि ऐसे आयोजन अब निरंतर किए जाएंगे। इन खिलाडिय़ों की ऊर्जा और खेल के प्रति समर्पण ने यह साबित कर दिया है कि व्हीलचेयर उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी ताकत का प्रतीक है। गांधी ग्राउंड के दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से खिलाडिय़ों का जो उत्साहवर्धन किया, वह इटारसी की संवेदनशीलता को दर्शाता है।








