- मध्यप्रदेश के किसान सोलंकी ने गीता के संदेश से परमाणु संपन्न राष्ट्रों का किया आह्वान
इटारसी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आज भारत दौरे के अवसर पर, मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के ग्राम सुपरली निवासी किसान योगेन्द्रपाल सिंह सोलंकी ने एक अभूतपूर्व पहल की है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से भारत की कृषि विरासत और विश्व शांति के प्रति चिंता को एक साथ प्रस्तुत किया है।
देश की मिट्टी का अनूठा स्वागत
किसान सोलंकी ने विभिन्न प्रकार के अनाजों और दालों, जैसे गेहूं, चना, बाजरा, तिल, राजगीरा, चावल, तुअर, रागी और खसखस का उपयोग करके कलाकृतियों का निर्माण किया है। इन कलाकृतियों की तस्वीरें उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को भेंट करने के लिए तैयार की हैं। सोलंकी का उद्देश्य कृषि प्रधान देश भारत की समृद्ध परंपरा और अतिथियों के स्वागत की भावना को दर्शाना है। वह पिछले कई वर्षों से इस कला के माध्यम से देश-दुनिया की हस्तियों की तस्वीरें बना रहे हैं, जिसकी प्रेरणा उन्हें प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक से मिली।
परमाणु संकट पर संदेश
इस अनूठी भेंट के साथ, सोलंकी ने दुनिया के प्रमुख परमाणु संपन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के लिए एक गंभीर और समयोचित संदेश भी संलग्न किया है। उन्होंने अपने पत्र में आग्रह किया है कि विश्व के मुखिया होने के नाते, वे स्वयं और (उनके) परमाणुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें और दुनिया का मार्गदर्शन करें। सोलंकी ने इस संदर्भ में श्रीमद्भगवद्गीता के 33वें अध्याय (श्लोक) का उल्लेख करते हुए परमाणु खतरों पर संदेश इन अनाजों की तस्वीरों के माध्यम से दिया है। यह संदेश कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने के महत्व पर जोर देता है।
पीएमओ और दूतावास को भेजी गई सूचना
योगेन्द्रपाल सिंह सोलंकी ने यह पत्र और तस्वीरें ई-मेल द्वारा राष्ट्रपति कार्यालय, दिल्ली स्थित रूसी दूतावास और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजकर अवगत कराया है कि यह संदेश दुनिया की सभी परमाणु संपन्न शक्तियों के लिए अनाजों से बनाया एक शांति पत्र भी है। इसके अतिरिक्त, किसान सोलंकी का एक मानवीय सपना भी है, वह अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी से प्राप्त राशि से एक विशेष मशीन का निर्माण करना चाहते हैं, जिसका उपयोग बोरवेल में गिरे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया जा सके।









